अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. चाय से ज्यादा केटली गरम वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी. इसका उदाहरण भी अक्सर हम देखते रहते हैं. ज्यादातर ऐसा होता है कि किसी अफसर से ज्यादा उसके परिजन उसके रुतबे का फायदा उठाते हैं. ऐसा ही एक मामला सामने ने आया है. जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, मुगलसराय में एआरटीओ कार्यालय परिसर में उस समय अफरातफरी मच गई जब अपर आयुक्त लिखा सरकारी वाहन अचानक परिसर में प्रवेश कर गया.
वाहन को देखते ही कार्यालय के कर्मचारियों और मौजूद बिचौलियों में हड़कंप मच गया. लोग इधर-उधर भागते नजर आए. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी एआरटीओ कार्यालय में कई बार छापेमारी की कार्रवाई हो चुकी है. जिसको लेकर कर्मचारी पहले से ही सहमे हुए थे. ऐसे में अपर आयुक्त लिखी गाड़ी के पहुंचते ही सभी को किसी बड़ी कार्रवाई की आशंका होने लगी.
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हालांकि कुछ देर बाद स्थिति उस समय सामान्य हुई, जब गाड़ी से अपर आयुक्त के रिश्तेदार बाहर निकले. यह देखकर कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली. इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकारी वाहन का निजी और पारिवारिक उपयोग किए जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किस नियम के तहत सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल रिश्तेदारों द्वारा किया जा रहा है. फिलहाल यह मामला कार्यालय और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
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