क्या राज्यपाल के संबोधन के बिना नहीं शुरू हो सकता विधानसभा का सत्र

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधान मंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से मना कर दिया है.

आइए जानते हैं कि क्या राज्यपाल के संबोधन के बिना सत्र हो सकता है या नहीं.

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 22 जनवरी को होने वाले राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से मना कर दिया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण के लगभग 11 पैराग्राफ पर आपत्ति जताई है.

अगर विचाराधीन सत्र साल का पहला सत्र है या फिर चुनाव के बाद पहला सत्र है तो राज्यपाल के भाषण के बिना विधानसभा कानूनी रूप से विधाई कामकाज नहीं शुरू कर सकती.

अगर विचाराधीन सत्र साल का पहला सत्र है या फिर चुनाव के बाद पहला सत्र है तो राज्यपाल के भाषण के बिना विधानसभा कानूनी रूप से विधाई कामकाज नहीं शुरू कर सकती.

ऐसे सत्र में की गई किसी भी कार्यवाही को अदालत में चुनौती दी जा सकती है और उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है.

हालांकि साल के बाकी सत्रों के लिए जैसे कि मानसून या फिर शीतकालीन सत्र जो साल का पहला सत्र नहीं होता, राज्यपाल का भाषण जरूरी नहीं है.

झारखंडी बाबा कौन हैं? क्यों हो रहे इतना वायरल