सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में पूर्व सरपंच सरदार राव की सनसनीखेज हत्या के मामले में आठ साल बाद कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रेणुका हुड्डा की अदालत ने गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई को इस मामले में बरी कर दिया है। वहीं, तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, जबकि छह आरोपियों को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है।

बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में कुल 11 आरोपियों पर फैसला सुनाया। गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई के अलावा एक अन्य आरोपी यतेंद्र को भी संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। जबकि हरदेवराम, अरुण और हरविंदर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त सुनील, मुकेश, भानु प्रताप सहित छह आरोपियों को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई है।

दिनदहाड़े गोलियों से की गई थी हत्या

यह मामला 23 अगस्त 2017 का है। जुराठड़ा गांव के पूर्व सरपंच सरदार राव उस दिन पलसाना कस्बे में नेकीराम की किराना दुकान पर बैठे हुए थे। दोपहर करीब 12:40 से 12:45 बजे के बीच एक कार दुकान के सामने आकर रुकी, जिसमें तीन बदमाश सवार थे। बदमाशों को पहले से सूचना थी कि सरदार राव दुकान पर मौजूद हैं।

कार से उतरते ही दो बदमाश दुकान के भीतर घुसे। पहले बदमाश ने बेहद नजदीक से रिवॉल्वर निकालकर सरदार राव पर गोली चलाई। इसके बाद दूसरे आरोपी ने भी फायर किया। फिर पहला बदमाश पलटकर दोबारा गोली मारता हुआ बाहर निकल गया। महज 10 सेकेंड के भीतर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर बदमाश मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल सरदार राव की मौके पर ही मौत हो गई थी।

चुनावी रंजिश में दी गई थी सुपारी

सरदार राव वर्ष 2010 से 2014 तक जुराठड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच रहे थे, जिसमें बराल, जुराठड़ा और दुल्हेपुरा गांव शामिल थे। 2015 के पंचायत चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बाद में सरकारी शिक्षक हरदेवराम का बेटा संदीप सरपंच बना, लेकिन सरकारी नौकरी लगने पर उसने पद से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद सितंबर में उपचुनाव प्रस्तावित थे, जिसमें सरदार राव को एक मजबूत प्रत्याशी माना जा रहा था। जांच में सामने आया कि हरदेवराम को चुनाव हारने का डर था। इसी कारण उसने अजमेर जेल में बंद सुभाष बराल से संपर्क कर सरदार राव की हत्या की सुपारी दी।

लॉरेंस गैंग का नाम आया सामने

पुलिस जांच के अनुसार सुभाष बराल ने इस हत्या के लिए गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई से मदद मांगी थी। आरोप था कि लॉरेंस गैंग के शूटर्स ने वारदात को अंजाम दिया। हालांकि, अदालत में पर्याप्त सबूतों के अभाव में लॉरेंस विश्नोई को बरी कर दिया गया।

आठ साल बाद मिला न्याय

करीब आठ साल तक चले इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई के बाद अदालत के फैसले ने एक बार फिर यह साबित किया कि कानून की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन न्याय अंततः मिलता है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मृतक सरदार राव के परिजनों ने संतोष जताया है, वहीं मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को मिली सजा ने क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना दिया है।

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