Bastar News Update : दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले में वेयरहाउस अनियमितताओं पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई सामने आई है। गीदम वेयरहाउस में सड़े चावल के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए करीब 33 हजार क्विंटल चावल मिलरों को वापस करने का आदेश दिया है। यह चावल लगभग 65 हजार से अधिक बोरियों में भरा हुआ था, जिसकी कीमत करीब 18 करोड़ रुपये आंकी गई है।

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राज्य स्तरीय जांच में दर्जनभर से ज्यादा मिलरों का चावल पूरी तरह अनुपयोगी पाया गया। यह स्टॉक जिले की लगभग एक महीने की जरूरत के बराबर था। अब फरवरी माह के लिए बाहर से चावल मंगाने की तैयारी की जा रही है। जिन मिलरों का चावल खराब पाया गया है, उन्हें किस्तों में उतनी ही मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला चावल वापस जमा करना होगा। आदेश नहीं मानने पर मिल सील और एफआईआर तक की कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन ने साफ किया है कि दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी। यह कार्रवाई जिले में खाद्य सुरक्षा और जवाबदेही की दिशा में बड़ा संकेत मानी जा रही है।

पर्यटन से रोजगार की राह, 2025-30 होमस्टे नीति हुई

बस्तर। बस्तर जिले में पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। होमस्टे नीति 2025–30 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इस नीति का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। अब ग्रामीण और आदिवासी परिवार अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित कर सकेंगे। शासन की ओर से निर्माण और उन्नयन के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। पर्यटक होटल नहीं, बल्कि बस्तर की संस्कृति, खानपान और जीवनशैली को करीब से जान सकेंगे। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के साथ पलायन पर भी रोक लगेगी। प्रशासन का दावा है कि योजना पूरी तरह पारदर्शी और सरल होगी। होमस्टे नीति बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है।

अवैध रेत खनन नियमों की खुलेआम अनदेखी

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने में विभागीय नाकामी उजागर हो रही है। नेशनल हाइवे के किनारे नदियों में मशीनों से दिन-रात रेत खनन जारी है। बांगापाल क्षेत्र में शंखिनी-डंकिनी नदी से रोज दर्जनों हाइवा रेत ढो रहे हैं। बिना पिटपास और अनुमति के रेत परिवहन से शासन को लाखों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि पुल से महज 50 मीटर दूरी पर खनन किया जा रहा है।

जबकि नियमों के अनुसार पुल के आसपास खनन प्रतिबंधित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। यह स्थिति विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मशीन से खनन प्रतिबंधित है और कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि नियम कागजों तक सीमित रहते हैं या जमीन पर उतरते हैं।

बैंक दबाव और आत्मघाती कदम

नारायणपुर। नारायणपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गढ़बेंगाल गांव में एक आदिवासी दंपती ने कथित मानसिक प्रताड़ना के चलते आत्मघाती कदम उठाया। महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि पति अब भी गंभीर हालत में भर्ती है। घटना स्थल से मिले सुसाइड नोट ने पूरे मामले को नया मोड़ दिया। नोट में बैंक कर्मचारियों पर दबाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

परिजनों का कहना है कि दंपती पिछले दो महीनों से भय और तनाव में थे। आईडी के दुरुपयोग और फर्जी निकासी का आरोप भी सामने आया है। इस मामले में एक बैंक कर्मी के निलंबन की जानकारी मिली है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। यह घटना सिस्टम के दबाव और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

दोपहिया चोरी गिरोह का पर्दाफाश

जगदलपुर। बस्तर पुलिस को दुपहिया वाहन चोरी के मामले में बड़ी सफलता मिली है। शहर में सक्रिय शातिर गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से पांच चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों की सूचना से कार्रवाई की।

चोरी की गाड़ियों को एक सुनसान खंडहर में छिपाकर रखा गया था। आरोपियों ने पूछताछ में अपराध स्वीकार किया है। बरामद वाहनों की कीमत लाखों में बताई जा रही है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।

धान खरीदी में अनियमितता

बकावंड। ब्लॉक बकावंड में धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खरीदी केंद्रों पर किसानों से सूखत के नाम पर अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। आरोप है कि इस अतिरिक्त धान का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। किसानों का कहना है कि उन्हें सीधे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं कुछ केंद्रों पर धान उठाव नहीं होने से टोकन की समस्या बनी हुई है। इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने ऊपर से सीमित खरीदी के निर्देश होने की बात कही। किसानों को समय पर भुगतान न मिलने से परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की जा रही है। मामला किसानों के भरोसे से जुड़ा अहम सवाल बन गया है।

लौह अयस्क ओवरलोडिंग – चयनात्मक कार्रवाई

दंतेवाड़ा। बचेली और किरंदुल क्षेत्र में लौह अयस्क ओवरलोडिंग का मामला फिर चर्चा में है। माइनिंग विभाग की कार्रवाई पर चयनात्मक रवैये के आरोप लग रहे हैं। एक ही साइडिंग से भरे ट्रकों में से सिर्फ एक पर कार्रवाई हुई। स्थानीय लोगों का दावा है कि सभी ट्रक समान रूप से ओवरलोड थे। लाइनर और अधिकारियों की मिलीभगत की चर्चा जोरों पर है। ट्रक मालिकों को सही भाड़ा और भुगतान नहीं मिल रहा। अधिक लोड का फायदा किसे मिल रहा है, यह बड़ा सवाल है। वे-ब्रिज खराब होने का बहाना अक्सर सामने आता है। पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई दबने के आरोप लगे हैं। अब विजिलेंस जांच की मांग तेज हो गई है।

सड़क सुरक्षा – गांधीगीरी का प्रयोग

बस्तर। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत बस्तर पुलिस ने अनोखी पहल की। नियम तोड़ने वालों को चालान नहीं, बल्कि फूल देकर जागरूक किया गया। बिना हेलमेट और सीट बेल्ट चलाने वालों को रोककर समझाइश दी गई।

पुलिस ने कहा कि नियम जुर्माने से नहीं, जीवन रक्षा से जुड़े हैं। इस पहल से कई चालक शर्मिंदा और जागरूक नजर आए। साप्ताहिक बाजार में लाउडस्पीकर से नियमों की जानकारी दी गई। महिला आरक्षकों ने भी लोगों से संवाद किया। नशे में वाहन न चलाने की सख्त हिदायत दी गई। अभियान का उद्देश्य दंड नहीं, संस्कार पैदा करना है। पुलिस की यह पहल लोगों में सकारात्मक संदेश दे रही है।