दक्षिणी दिल्ली के निवासियों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही सड़क निर्माण की मांग अब बड़ा कानूनी मुद्दा बन गई है। इस संबंध में दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली सरकार और नगर निगम को कड़े निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने न केवल विवादित सड़क के निर्माण का आदेश दिया है, बल्कि संबंधित क्षेत्र की अन्य सड़कों और गलियों की भी मरम्मत व पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता और खराब सड़कों के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होना गंभीर विषय है।
सड़कों और गलियों को बनाने के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अब दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को केवल संबंधित सड़क तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि क्षेत्र की सभी मुख्य सड़कों और सहायक सड़कों (गलियों) का भी निर्माण एवं मरम्मत करानी होगी। पीठ ने सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन में सड़क का निर्माण तो किया गया, लेकिन घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण वह कुछ ही दिनों में पहले से भी बदतर स्थिति में पहुंच गई। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली नगर निगम के बीच आंतरिक मतभेदों के चलते सड़कों के कई हिस्सों में या तो मरम्मत/निर्माण हुआ ही नहीं, और जहां हुआ भी है, वहां इस्तेमाल की गई सामग्री अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतरी।
3 महीने में होना था टेंडर
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता स्वयं पीठ के समक्ष उपस्थित हुए और बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में संबंधित सड़क के निर्माण के लिए 28 जून 2025 को टेंडर आमंत्रण नोटिस जारी किया गया था। अदालत के निर्देशों के अनुसार तीन महीने की अवधि में सड़क का निर्माण पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक न तो कार्य शुरू हुआ है और न ही ज़मीनी स्तर पर कोई प्रगति दिखाई दे रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने नाराज़गी जताते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख पर इस देरी के संबंध में स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की है।
क्या था मामला?
कोटला मुबारकपुर इलाके के निवासियों ने बापू पार्क की सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर वर्ष 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। स्थानीय निवासियों की ओर से मनजीत सिंह चुघ ने याचिका दायर की थी, जिसके साथ सड़क की जर्जर हालत दर्शाती तस्वीरें भी अदालत में पेश की गई थीं। हाईकोर्ट ने उस समय संबंधित सड़क के निर्माण के स्पष्ट निर्देश दिए थे। आदेश के अनुपालन में सड़क का निर्माण तो कराया गया, लेकिन दो से तीन महीने के भीतर ही बारिश के बाद सड़क की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई। सड़क पर गड्ढे और टूट-फूट फिर से सामने आने लगी।
सड़क की दोबारा बिगड़ती स्थिति से परेशान होकर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, बल्कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को क्षेत्र की अन्य सड़कों की मरम्मत व निर्माण के भी निर्देश जारी किए।
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