अमेरिकी सरकार की ओर से भारत के लिए बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका की ओर से संकेत मिले हैं कि जल्द ही भारत पर से रूसी तेल टैरिफ हटा दिया जाएगा. ये संकेत ऐसे समय पर मिले हैं, जब भारत और यूरोप के बीच एक बड़ी ट्रेड डील का ऐलान होने वाला है. मौजूदा समय में यूरोप और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर अच्छे संबंध नहीं है. ऐसे में यूरोप और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड काफी हिस्सा भारत की ओर जाने की उम्मीद है. यही कारण है कि कुछ दिन पहले दावोस में अमेरिका ने यूरोप पर टैरिफ लगाने से इनकार किया था. भारत को 5 बिलियन डॉलर यानी करीब 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा हो सकता है.
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर टैरिफ लगाया था. उन्होंने दावा किया कि टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद में कमी आई है और अमेरिकी सरकार द्वारा उठाया गया कदम सफल रहा है. रूसी तेल पर 25 फीसदी टैरिफ अभी भी लागू है. मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का रास्ता खुल गया है.
दावोस में मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना करीबी दोस्त बताया और विश्वास जताया कि भारी टैरिफ को लेकर जारी तनाव के बावजूद अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे. ट्रम्प ने कहा कि मैं आपके प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं. वे एक शानदार व्यक्ति और मेरे मित्र हैं.
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ताजा टिप्पणी से पता चलता है कि अमेरिका, भारत पर लगाए गये 25 प्रतिशत टैरिफ में कमी ला सकता है। हालांकि ये कमी किस तरह का होगा, कितना होगा, फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है, जिसमें 25 प्रतिशत टैरिफ रूसी तेल के आयात को लेकर है।
ट्रंप ने कहा अगर भारत रूसी ऊर्जा पर वाशिंगटन के रुख से सहमत नहीं होता है, तो उसे व्यापारिक तौर पर तुरंत परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. उन्होंने कहा था कि हम व्यापार करते हैं, और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं. भारत ने रूसी तेल आयात पर रोक लगाने के संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया है, साथ ही कहना है कि देश के ऊर्जा संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित और मूल्य स्थिरता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.
500 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाने वाले इस प्रस्तावित अमेरिकी विधेयक के बावजूद, नई दिल्ली अपनी “इंडिया फर्स्ट” एनर्जी पॉलिसी पर अडिग है. भारत ने बार-बार कहा है कि उसकी प्राथमिकता अपने 1.4 अरब नागरिकों के लिए किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
ट्रंप ने इसी महीने की शुरुआत में विधेयक को मंजूरी दी थी. इस प्रस्ताव में रूसी कच्चे तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने का प्रावधान है, जिससे भारत को व्यापार संबंधी गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है.
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो पुतिन की युद्ध मशीन को फ्यूल देने वाला सस्ता रूसी तेल खरीदते हैं. उन्होंने आगे कहा था कि इससे ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील पर “अत्यधिक दबाव” बनाने का मौका मिलेगा. चीन और भारत वर्तमान में रूसी कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदार हैं.
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