रायपुर। भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार 3 लोकसेवकों के खिलाफ आज विशेष न्यायालय (एसीबी), रायपुर में प्रथम पूरक चालान पेश किया है. इसमें बताया गया कि आरोपियों की वजह से शासन को 40 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है.
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बता दें कि दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 24, ग्राम टोकरो) एवं बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह) को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 में धारा 7 सी, 12 भ्र.नि.अ. 1988 (संशोधित 2018) एवं धारा 409, 467, 471, 420, 120-बी भादवि के तहत प्रकरण दर्ज है.

एसीबी ने पूरक चालान के जरिए बताया कि तीनों आरोपियों से संबंधित प्रकरणों में प्रथम दृष्टया शासन को कुल ₹39,65, 89, 257 की आर्थिक क्षति सामने आई है. प्रकरण में अन्य आरोपियों के विरुद्ध विवेचना जारी है.
प्रकरण में दर्ज विभिन्न धाराओं में तहत लोकसेवक, मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्ति एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र कर भारतमाला परियोजना रायपुर- विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू-अर्जन प्रकरण में शासन द्वारा अर्जित भूमि को पुनः शासन को विक्रय कर मुआवजा देने, निजी भूमि के गलत मुआवजा देने, बैकडेट में बटवारा एवं नामांतरण करने, भूमि स्वामी के बदले किसी अन्य को मुआवजा देने तथा निजी भूमि के गलत मुआवजा एवं उसके टुकड़े कर उपखंडों में विभाजित कर शासन को हानि कारित करने के आरोप हैं.
आरोपियों की भूमिका

अभियुक्त दिनेश पटेल की भूमिका: तत्कालीन पटवारी हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा दिनेश पटेल ने खाता दुरुस्ती/ प्रपत्र-10 / आपत्ति निराकरण आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया. अवार्ड के समय अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखण्डों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई गई. फलस्वरूप शासन को 30,82,14,868 रुपए की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है.

अभियुक्त लेखराम देवांगन की भूमिका: तत्कालीन पटवारी (ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) लेखराम देवांगन ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र- 10 / भुगतान प्रतिवेदन आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया. अवार्ड के समय “मूल खसरों को कृत्रिम उपखण्डों में दर्शाकर वास्तविक देय राशि की तुलना में अत्यधिक मुआवजा भुगतान कराया गया. फलस्वरूप शासन को 27,16,26,925 रुपए की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है.

अभियुक्त बसंती घृतलहरे की भूमिका: तत्कालीन पटवारी (ग्राम भेलवाडीह) बसंती घृतलहरे ने “मूल खसरों को अवार्ड चरण में कृत्रिम उपखण्डों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई. फलस्वरूप शासन को 1,67,47,464 रुपए की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है.
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