उमेश यादव, सागर। स्मार्ट सिटी के दावे करने वाले सागर शहर से शनिवार को एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई, जिसने इंसानियत पर गहरे सवाल खड़े कर दिए। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में किराए के कमरे में रहने वाला एक वृद्ध अपनी बीमार पत्नी को हाथ ठेले पर अस्पताल ले जा रहा था, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे वही वृद्ध पत्नी के शव को हाथ ठेले पर लेकर श्मशान घाट की ओर जाता दिखाई दिया।
रोते हुए वृद्ध ने अपना नाम पवन साहू बताया। उसकी पत्नी का नाम पार्वती साहू था। पवन साहू मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ग्राम सौरई, मड़ावरा, जिला ललितपुर का निवासी है। वह पिछले 12–13 वर्षों से पत्नी के साथ सागर शहर में रहकर सब्जी का ठेला लगाकर जीवन यापन कर रहा था। अचानक पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर वह मजबूरी में हाथ ठेले पर ही उसे अस्पताल ले जाने निकला, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
जब उससे एंबुलेंस न बुलाने के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि उसे किसी प्रकार की जानकारी नहीं थी और वह अपनी पत्नी को किसी तरह अस्पताल पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। अब वही ठेला उसकी पत्नी की अंतिम यात्रा का साधन बन गया।
सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि घटना सुबह 10 बजे की है, जब शहर में काफी चहल-पहल रहती है। इसके बावजूद किसी राहगीर या आसपास के लोगों ने मदद की पहल नहीं की। यह दृश्य समाज की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
हालांकि वृद्ध करीब दो किलोमीटर की दूरी तय कर मोतीनगर चौराहा पहुंचा, जहां मोतीनगर वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि नरेश यादव और अन्य लोगों ने आगे बढ़कर उसकी मदद की और पत्नी का अंतिम संस्कार संपन्न कराया। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास के साथ-साथ क्या हमारी मानवीय संवेदनाएं कहीं खोती जा रही हैं।
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