आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस बार गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक बनने जा रहा है। जिन गांवों में कभी नक्सलियों की दहशत, बंदूक और डर का माहौल रहता था, वहां 26 जनवरी को पहली बार देश का तिरंगा शान से फहराया जाएगा। बीजापुर जिले के उल्लूर, चिलमसका, पेद्दाकोमरा, कोमागुड़ा (पीड़िया), बेलनार, ताड़पाल और कोडापाली जैसे गांवों में पहली बार झंडावंदन की तैयारी पूरी कर ली गई है। यह वही क्षेत्र हैं, जहां कभी सरकारी कार्यक्रमों की कल्पना भी मुश्किल थी।

दंतेवाड़ा जिले के पिल्लूर, डोडीसुमार और कमालूर गांवों में भी पहली बार गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया जाएगा। लंबे समय तक यह इलाके नक्सल प्रभाव में रहे, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। नारायणपुर जिले के ओरछा क्षेत्र के पलवाया, एडूम, ईदवाया और कुकड़मेल गांवों में भी पहली बार झंडा फहराया जाएगा। वहीं सोनपुर–ओरछा बेल्ट के सिरसम, टोके, पाकेटा, काकूर और बाटलेड़ा गांव भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे। नक्सलियों के कोर एरिया माने जाने वाले कोडनार, अंजागार, मंडेला, जदूर और बायपेटा गांवों में तिरंगे का फहराना सुरक्षा बलों और प्रशासन की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
सबसे अहम बात यह है कि करेगुट्टा पहाड़ पर भी पहली बार झंडा फहराया जाएगा, जिसे नक्सलियों का सबसे सुरक्षित और मजबूत किला माना जाता रहा है। इसके अलावा, सुकमा जिले के चिंतनार क्षेत्र के तुस्मालमेटी, बीरागोड़ा, पालागुड़ा, नागाराम, वंजलवाही, गोरगुड़ा, पेद्दाबोटेकल और उसरासाल गांवों में भी गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। यह केवल झंडावंदन नहीं है, बल्कि बस्तर में शांति, लोकतंत्र और संविधान की मजबूती का प्रतीक है। तिरंगे का यह सफर उन इलाकों तक पहुंच रहा है, जहां कभी राष्ट्र की मौजूदगी सबसे बड़ी चुनौती थी। करेगुट्टा पहाड़ को 25 वर्षों के बाद माओवादियों के कब्जे से मुक्त कराया गया था, जिसमें 24,000 सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन चलाकर इसे मुक्त कराया।
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