उत्तम कुमार, मुजफ्फरपुर। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज रविवार को मुजफ्फरपुर में सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद को संबोधित किया। बोचहा के गरहा स्थित ब्लू डायमंड होटल में आयोजित इस संवाद में मोहन भागवत ने कहा कि, अपना देश आगे बढ़े, दुनिया का सिरमौर बने। इसकी परिस्थिति भी बन रही है, लेकिन चुनौती भी कम नहीं है।

मोहन भागवत ने कहा कि, कुछ देशों को भारत का आगे बढ़ना अच्छा नहीं लग रहा है। उन्हें अपनी दुकान बंद होने का खतरा दिख रहा है। जिससे वे आगे बढ़ने के मार्ग में बाधा खड़ी करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि, डर दूर करने के लिए निर्भयता जरूरी है। निर्भयता से सबलता आएगी, जिससे समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि, दुनिया में सद्भाव जरूरी है। सद्भाव नहीं रहने पर लोग आपस में लड़कर मर जाएंगे। किसी भी विदेशी शक्ति ने अपनी ताकत के बल पर हमें पराधीन नहीं किया। विदेशी शक्तियों ने हमारी फुट का लाभ उठाकर जीत हासिल की। समाज मे सद्भाव रहने पर लोग सभी के सुख दुख में शामिल होंगे, इससे समस्या अपने आप दूर हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि अब अपना समाज भी जाग रहा है। देश भी आगे बढ़ रहा है। खंड या प्रखंड स्तर पर बैठकर समाज की समस्या दूर करने पर लोगों को किसी नेता का मोहताज नहीं होना होगा। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से अपनी अपनी जाति बिरादरी की उन्नति, प्रगति के लिए प्रयत्न करने, दूसरी जाति या बिरादरी की समस्या दूर करने या सामूहिक रूप से समस्या दूर करने के लिए किए गए कार्य की जानकारी ली।

मोहन भागवत ने कहा कि, समस्या बताने के साथ उपाय भी बताना चाहिए। आज देश सज्जन शक्ति के भरोसे चल रहा है। सज्जन लोग अपने अपने स्तर पर समस्या दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। इस कड़ी को और नीचे ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि, सिर्फ व्यवस्था से समस्या दूर नहीं होगी। समाज के लोग आपस मे बैठकर चिंतन करेंगे तब समस्या से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि संघ समाज के लोगों को जागृत कर रहा है, लेकिन जागरूकता जमीन पर होना चाहिए, उन्हें जाति बिरादरी का अभाव दूर करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संपन्न लोग ही समाज की सेवा करेंगे ऐसा नहीं है, जिनके मन में सद्भाव आ जाएगा वहीं पीड़ित और अभावग्रस्त लोगों की सेवा कर पाएगा। सबको मिलकर अभावग्रस्त, समस्या पीड़ित और जरूरतमंद की समस्या दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई गांव ऐसे हैं, जहां समाज के लोगों ने बिना सरकार की सहायता के ही आपस में अपनी समस्याओं को सुलझाया है। इसलिए सभी को अपने स्तर पर चिंतन कर अपनी समस्याों को दूर करना चाहिए। जब सभी लोग एक साथ बैठकर समस्या पर चिंतन करेंगे तो कोई दूसरा हिन्दू समाज को नहीं तोड़ पायेगा।

वहीं, जनसंख्या नियंत्रण के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि, हिंदू समाज को 3 बच्चे पैदा करने से किसी ने रोका तो नहीं है। सरकार भी 2-1 बच्चे पैदा करने को कहती है। उन्होंने कहा कि, देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है। यह हिन्दू राष्ट्र ही है। समाज में विविधता है, अलगाव नहीं है। अंग्रेजों ने अलगाव कर शासन किया। उसी अलगाव को दूर कर हिंदू समाज को एकजुट करना है।

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