रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की नई गाइडलाइन दरों में भारी वृद्धि के चलते सभी जिलों में जमीन की रजिस्ट्री की संख्या घट गई है। विशेषकर शहरी इलाकों में न के बराबर रजिस्ट्री हो रही है। वहीं, राज्य सरकार अब जमीन की गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण करने जा रही है। वहीं, गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण पर माथापच्ची जारी है।

जिला मूल्यांकन समितियां प्राप्त दावा-आपत्तियों का परीक्षण में जुटी हुई हैं। अब तक किसी भी जिले से पुनरीक्षण का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास नहीं पहुंचा है। पंजीयन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिला समितियों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा और फिर पुनरीक्षित गाइडलाइन दरें जारी की जाएंगी।

बताया जा रहा है कि जमीन की नई गाइडलाइन दरों के लागू होने के बाद से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव व बिलासपुर में जमीन की रजिस्ट्री न के बराबर हो रही है। गाइडलाइन दरों में कई जगह 600 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है, जिसका विरोध भी हुआ और कुछ संशोधन भी किए गए। वहीं, गाइडलाइन दरों पर 31 दिसंबर तक आपत्तियां बुलाई गई थीं। सबसे ज्यादा आपत्तियां रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर व राजनांदगांव जिले में आई हैं। रायगढ़, कोरबा व अंबिकापुर में भी आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।

संपत्तियों की रजिस्ट्री पर असर
प्रदेश में नई गाइडलाइन दर का असर संपत्ति की रजिस्ट्री पर पड़ा है। जमीन खरीदना व बेचना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। इससे पंजीयन कार्यालयों में संपत्तियों की रजिस्ट्री कम हो गई है। संपत्ति की खरीदी-बिक्री से पहले लोग संशोधित गाइडलाइन दरों का इंतजार कर रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा आपत्तियों का परीक्षण किया जा रहा है। गाइडलाइन दरों में न्यूनतम 20 फीसदी से अधिक की कमी किए जाने के संकेत हैं। कुछ जगह पर गाइडलाइन दरों में सौ प्रतिशत तक कमी की जा सकती है। राज्य शासन द्वारा बीते 20 नवंबर से जमीन की गाइडलाइन दरों में शहरी क्षेत्र में 20 प्रतिशत व ग्रामीण क्षेत्र में 600 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। जमीन की
प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद ही मूल्यांकन बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा।

जिलों से प्रस्ताव का इंतजार
पुष्पेंद्र मीणा, महानिरीक्षक (पंजीयन) ने बताया कि जमीन की नई गाइडलाइन दरों पर प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण जिला मूल्यांकन समितियां कर रही हैं। जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद संशोधित गाइडलाइन दरें जारी की जाएंगी।

नई गाइडलाइन दरों से किसानों को मिलेगा न्यायसंगत मुआवजा

नई गाइडलाइन दरों को लेकर प्रदेशभर में भारी विरोध हो रहा है। वहीं, पंजीयन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक व तर्कसंगत पुनरीक्षण किया गया है। गाइडलाइन दरों में वर्ष 2017-18 के बाद से कोई संशोधन नहीं हुआ था। नई गाइडलाइन दरों से किसानों-भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक व न्यायसंगत मुआवजा मिल सकेगा।