77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने दुनिया को अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल दिखाई. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) बनाई है. यह मिसाइल भारतीय नौसेना के लिए बनाई जा रही है. दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाएंगे. भारतीय नौसेना के लिए बनी यह मिसाइल हिंद महासागर में समुद्री हमले की क्षमता बढ़ाएगी. भविष्य में रेंज 3000-3500 किमी तक होगी.

DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई गई. ये भारत के भविष्य का बह्मास्त्र है. इसकी रेंज 1500 किमी है. हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री हमले की क्षमता को बहुत मजबूत करेगी. यह मिसाइल हाइपरसोनिक है, जिससे दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाते.

  • रेंज: लगभग 1500 किलोमीटर 
  • स्पीड: हाइपरसोनिक (मैक 8-10 तक) — यह दुश्मन जहाजों को 15 मिनट से कम समय में नष्ट कर सकती है.
  • प्रकार: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) — रॉकेट से ऊपर जाती है, फिर ग्लाइड करके अनियमित रास्ते से लक्ष्य तक पहुंचती है. इससे इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है.
  • पेलोड: विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जा सकती है. दुश्मन के युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर को नष्ट करने में सक्षम.
  • उद्देश्य: मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए एंटी-शिप रोल में, लेकिन भविष्य में लैंड-अटैक वर्जन भी संभव.
  • विकास:DRDO के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स, हैदराबाद में बन रही है. हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है।

DRDO के वैज्ञानिकों का कहना है कि हाइपरसोनिक मिसाइल  भारत का भविष्य हैं. यह मिसाइल दुनिया की चुनिंदा देशों (जैसे रूस, चीन, अमेरिका) की सूची में भारत को शामिल करेगी.

यह मिसाइल दुश्मन के रडार से बचकर तेजी से हमला करती है. हाइपरसोनिक स्पीड के कारण दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है. यह भारत को हिंद महासागर में मजबूत स्थिति देगी, खासकर चीन की बढ़ती नौसेना के खिलाफ. DRDO का लक्ष्य है कि भविष्य में इसकी रेंज 3000-3500 किलोमीटर तक बढ़ाई जाए.

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