USA React On India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच आज ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट डील होने जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ हाईलेवल शिखर वार्ता करेंगे। इसके बाद दोनों देशों के बीच दोनों के बीच फ्री ट्रेड डील, जिसे मदर ऑफ ऑल डील (Mother of All Deals) कहा जा रहा है, इसपर हस्ताक्षर होंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर अमेरिका की भी प्रतिक्रिया आई है। भारत और ईयू के बीच होने जा रही ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) डील पर अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। अमेरिका ने कहा कि यूरोपीय देश खुद के खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहे हैं।

भारत और यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट डील पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, लेकिन इसके बावजूद यूरोपीय देशों ने भारत के साथ बड़ा ट्रेड एग्रीमेंट साइन कर लिया। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते यूरोप ने भारत के साथ ट्रेड डील साइन की। यूरोपियंस असल में अपने ही खिलाफ जंग को फाइनेंस कर रहे हैं।

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है, उसे रिफाइन करता है और फिर यूरोपीय देश वही तेल उत्पाद खरीदते हैं। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को पैसा मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस वजह से अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया।

भारत पर 50% तक टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए उसने यूरोप से ज्यादा ‘कुर्बानी’ दी है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यूरोप खुद के खिलाफ चल रही जंग को ही पैसा दे रहा है। अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाए हैं। इसमें से 25% टैरिफ खास तौर पर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए हैं। यह फैसला अगस्त 2025 में लिया गया था। इन सबके बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र हैं और दोनों के रिश्ते ऐतिहासिक हैं।

18 साल भारत-EU में डील पर चली बातचीत

करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद यह FTA “मदर ऑफ ऑल डील्स” माना जा रहा है। इस समझौते का मकसद भारत और EU के बीच व्यापार को नई ऊंचाई देना है। FTA के तहत ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे संवेदनशील सेक्टरों पर फोकस किया गया है। भारत चरणबद्ध तरीके या सीमित कोटा के तहत BMW, मर्सिडीज-बेंज और वोक्सवैगन जैसी यूरोपीय कारों पर टैरिफ घटा सकता है। इसके बदले EU भारतीय टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, जेम्स एंड ज्वेलरी और फुटवियर पर टैरिफ में बड़ी राहत देने को तैयार है।

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