अमित पांडेय, डोंगरगढ़. जैन धर्म के महान संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की समाधि पर उनकी दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर डोंगरगढ़ का चन्द्रगिरि तीर्थ एक बार फिर राष्ट्रीय आस्था और विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है. इस अवसर पर देशभर में श्रद्धा के साथ-साथ आचार्य श्री को भारत रत्न प्रदान किए जाने की मांग भी तेज होती दिखाई दे रही है. आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने 18 फरवरी 2024 को चन्द्रगिरि तीर्थ में जैन परंपरा की सर्वोच्च साधना सल्लेखना के माध्यम से समाधि प्राप्त की थी. उनका जीवन तप, त्याग, संयम और नैतिक मूल्यों से ओत-प्रोत रहा. वे केवल जैन समाज के संत नहीं थे, बल्कि ऐसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व थे जिनकी विचारधारा ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया.


दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर चन्द्रगिरि तीर्थ में दिनभर भक्ति, आराधना, स्मृति आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसी क्रम में जैन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा केंद्र सरकार से यह मांग उठाई जा रही है कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाए.

इस महत्वपूर्ण आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई दिग्गज नेता भी 27 जनवरी को डोंगरगढ़ प्रवास पर रहेंगे. वे चन्द्रगिरि तीर्थ पहुंचकर समाधि स्थल पर दर्शन करेंगे और स्मृति महोत्सव में शामिल होंगे. उनके प्रवास को आध्यात्मिक आयोजन के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. स्थानीय लोगों और समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति से चन्द्रगिरि तीर्थ और डोंगरगढ़ को राष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना और मजबूत हुई है. साथ ही भारत रत्न की मांग को भी एक औपचारिक और प्रभावी मंच मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
कुल मिलाकर, दूसरी पुण्यतिथि पर विद्यासागर जी महाराज की समाधि से उठ रही श्रद्धा की यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती दिख रही है, जहां एक संत की साधना, त्याग और जीवन मूल्यों को देश के सर्वोच्च सम्मान से जोड़ने की मांग लगातार मजबूत हो रही है.
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