केंद्र सरकार यमुना नदी में पानी का पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत ऊपरी गंगा नहर और हरियाणा की मुनक नहर के जरिए यमुना में पानी के फ्लो को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना की हालत सुधारने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही, हरियाणा से यमुना में गिरने वाले गंदे नालों पर सख्ती करने की भी योजना बनाई जा रही है। माना जा रहा है कि नदी में प्रदूषण का बड़ा हिस्सा इन्हीं नालों के जरिए आता है, जिसे रोकने के लिए निगरानी और ट्रीटमेंट सिस्टम को मजबूत किया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बढ़ाने की तैयारी तो की जा रही है, लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि इसे लागू करने के लिए अब तक कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई है। ई-फ्लो का उद्देश्य नदी के पानी को उसकी प्राकृतिक और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुसार व्यवस्थित करना होता है, ताकि प्रदूषण कम हो और जलीय जीवन बना रहे।
दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (DPCC), पर्यावरण विभाग और विभिन्न विशेषज्ञ एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, यमुना को कम से कम 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत है। इसके मुकाबले मौजूदा समय में नदी में लगभग 10 क्यूमेक्स पानी ही बह रहा है, जो न्यूनतम जरूरत से भी काफी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतना कम फ्लो होने की वजह से नदी में गंदगी ठहर जाती है और सेल्फ-क्लीनिंग क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।
इस मुद्दे पर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है। 2023 में गठित एक संसदीय समिति ने खासतौर पर कालिंदी कुंज और ओखला क्षेत्र को यमुना का सबसे संवेदनशील हिस्सा बताते हुए ई-फ्लो के जरिए तुरंत कदम उठाने की सिफारिश की थी। समिति का कहना था कि यदि यहां पर्याप्त पानी छोड़ा जाए, तो प्रदूषण का स्तर कम हो सकता है और झाग (फोम) जैसी गंभीर समस्या पर भी काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
यूपी-हरियाणा को निर्देश
यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार की योजना के ठोस तकनीकी विवरण सामने आए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि यमुना बेसिन के राज्यों को जल प्रवाह बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दिल्ली में नदी की हालत में सुधार किया जा सके। अधिकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की ऊपरी गंगा नहर से लगभग 800 क्यूसेक पानी को वजीराबाद बैराज की ओर मोड़ने की योजना है। यह नहर पहले से ही पूर्वी दिल्ली के दो वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को पानी की आपूर्ति कर रही है, ऐसे में अतिरिक्त पानी मोड़ने को तकनीकी रूप से संभव बताया जा रहा है। इसके अलावा, हरियाणा की मुनक नहर से भी करीब 100 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़े जाने की तैयारी है। इससे दिल्ली खंड में नदी के फ्लो को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
थर्ड पारी के जरिए ऑडिट
यमुना नदी की हालत सुधारने के लिए दिल्ली सरकार ने तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के माध्यम से ऑडिट कराने का फैसला लिया है। इस ऑडिट में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से यमुना में गिरने वाले सभी नालों की जांच शामिल होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य नालों से नदी में गिरने वाले गंदे पानी और प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। यमुना को फिर से जिंदा करने के लिए बीते कई सालों में विभिन्न उपायों और योजनाओं पर लगातार चर्चा हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल सका। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त ई-फ्लो, नालों की सफाई और बैराज में गाद हटाने जैसे उपायों को समन्वित रूप से लागू करना बेहद जरूरी है।
दिल्ली की सत्ता में वापसी करने वाली बीजेपी सरकार भी पिछली सरकारों की तरह यमुना को साफ और चमकदार बनाने का दावा करती आ रही है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि बार-बार किए गए वादों और योजनाओं के बावजूद यमुना की स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं आया। स्रोतों के मुताबिक, थर्ड पार्टी ऑडिट के परिणामों के आधार पर नालों की सफाई, जल प्रवाह में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित और बाध्यकारी कार्रवाई की योजना बनाई जाएगी। इस कदम से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यमुना की जल गुणवत्ता में सुधार और झाग जैसी समस्याओं में कमी आएगी।
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