कुंदन कुमार/पटना। देशभर में यूजीसी कानून को लेकर विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार इसके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता अरुण यादव ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कानून का खुलकर समर्थन किया है।
विरोध करने वालों पर साधा निशाना
अरुण यादव ने कहा कि जो लोग यूजीसी कानून का विरोध कर रहे हैं, उन्हें संविधान में उल्लेखित समानता के अधिकार की सही जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले लोग वास्तव में संविधान की मूल भावना का सम्मान नहीं कर रहे हैं।
सर्वे में सामने आई गंभीर सच्चाई
राजद प्रवक्ता ने बताया कि देशभर की यूनिवर्सिटियों और शिक्षण संस्थानों में कराए गए सर्वे में यह सामने आया है कि ओबीसी और दलित वर्ग के छात्रों को लगातार अपमान और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च जाति से आने वाले कुछ छात्र विभिन्न तरीकों से इन वर्गों के छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
कानून की जरूरत क्यों पड़ी
अरुण यादव ने कहा कि इसी सामाजिक असमानता और उत्पीड़न को देखते हुए यूजीसी कानून लाने की आवश्यकता महसूस की गई। यह कानून उन छात्र-छात्राओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है, जिन्हें आज भी शिक्षा संस्थानों में बराबरी का सम्मान नहीं मिल पा रहा है।
संविधान का सम्मान जरूरी
उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान और उसके समानता के अधिकार में विश्वास रखते हैं, उन्हें इस कानून का समर्थन करना चाहिए। यूजीसी कानून का विरोध करने का मतलब साफ है कि ऐसे लोग भारतीय संविधान की भावना को नहीं समझना चाहते।
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