रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर से सेक्स सीडी की चर्चा हो रही है. इस कहानी की शुरुआत 27 अक्टूबर 2017 को हुई थी, जब पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने अपने बंगले में कथित सेक्स सीडी को सार्वजनिक किया था. सवा आठ साल के सफर में इस कहानी में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए इसे विस्तार से आपको लल्लूराम डॉट कॉम बताने जा रहा है.

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तमाम तरह की चर्चाओं के बीच तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने पत्रकार और रिश्तेदार विनोद वर्मा और व्यापारी कैलाश मुरारका के साथ 27 अक्टूबर की सुबह 6 बजे अपने बंगले एक प्रेस कांफ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने मीडिया को एक सीडी बांटी थी. भूपेश बघेल का दावा था कि आपत्तिजनक वीडियो में महिला के साथ बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखने वाला व्यक्ति छत्तीसगढ़ का मंत्री राजेश मूणत है.

इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, लेकिन सीडी के सामने आने के बाद मंत्री राजेश मूणत ने इसका खंडन करते हुए सीडी को फर्जी बताया था. इसके साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी.

भाजपा नेता ने दर्ज कराई थी शिकायत

भाजपा नेता प्रकाश बजाज की शिकायत पर 26 अक्टूबर 2017 को पंडरी थाने में पहला केस दर्ज किया गया. बजाज की दर्ज कराई एफआईआर में ब्लैकमेलिंग का जिक्र है. किसी ने लैंडलाइन से उन्हें फोन पर कहा था कि मेरे पास तुम्हारे आकाओं के अश्लील वीडियो हैं, पैसे दो वर्ना सीडी बनाकर बांट दूंगा.

दिल्ली के दुकान में बनाई गई थी फर्जी सीडी

पुलिस ने नंबर ट्रेस किया और उन्हें दिल्ली की एक दुकान के बारे में जानकारी मिली. यह दुकान सीडी रिकॉर्डिंग का काम करती थी. सीबीआई और पुलिस का दावा है कि इसी से वे विनोद वर्मा तक पहुंचे. इसके बाद दूसरे आरोपियों तक पहुंचे, जिनके खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं.

भूपेश बघेल के साथ वर्मा को किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए सितंबर 2018 में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल के साथ गाजियाबाद से वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने दावा किया था कि वर्मा के निवास से अश्लील सीडी के वीडियो क्लिप की 500 सीडी और 2 लाख रुपये नकद जब्त किया था. 

भूपेश बघेल के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट

सितंबर 2018 में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल की गिरफ्तारी के साथ राज्य की राजनीति में हलचल मच गई थी, भूपेश बघेल ने जमानत लेने से इनकार कर दिया था. गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांव से लेकर शहरों तक बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किए. कुछ दिनों बाद भूपेश जेल से रिहा हो गए. इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करते हुए 90 में से 68 सीटें जीतीं.

सीबीआई ने लगाई केस ट्रांसफर करने की अर्जी

सीबीआई ने 2017 में सीडी मामले में केस दर्ज किया था. सीबीआई के मुताबिक, 95 हजार में मॉर्फ सीडी बनाई गई और दिल्ली में इसकी कॉपी कराई गई. इसमें बड़ी रकम का लेन-देन हुआ है. सीबीआई ने राज्य में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद केस दिल्ली ट्रांसफर करने अर्जी लगाई थी, क्योंकि उसमें तत्कालीन सरकार के प्रभावशाली लोगों के नाम भी थे. सीबीआई की अर्जी दिल्ली की कोर्ट में विचाराधीन रही. इस वजह से फैसला नहीं हुआ कि केस की सुनवाई कहां होगी.

सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने आरोपों से किया था मुक्त

जनवरी-2025 में दिल्ली कोर्ट ने फैसला किया है कि केस ट्रांसफर नहीं होगा, जिसके बाद रायपुर की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में केस की सुनवाई हुई. 4 मार्च 2025 को रायपुर की विशेष सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए भूपेश बघेल को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था. स्पेशल कोर्ट ने तमाम धाराएं को हटाते हुए कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई आधार नहीं है. इस फैसले के बाद सीबीआई ने सेशन कोर्ट का रुख किया था.

23 फरवरी को होगी पहली सुनवाई

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी केस में रायपुर सेशन कोर्ट ने 24 जनवरी को सीबीआई के लोअर कोर्ट के फैसले को निरस्त कर रिव्यू पिटीशन मंजूर किया था, जिसके बाद पहली सुनवाई 23 फरवरी को होगी. सेशन कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नियमित कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं. केस एक बार फिर से नए सिरे से शुरू हो, इसके पहले लल्लूराम आपको अब तक की पूरी तथा-कथा बताने जा रहा है.

हाई कोर्ट का रुख करेंगे पूर्व मुख्यमंत्री

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सेशन कोर्ट के फैसले के बाद हाई कोर्ट में जाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले ही इस केस से डिस्चार्ज किया जा चुका था, लेकिन अब सीबीआई ने सेशन कोर्ट में दोबारा अपील की है. इसके साथ उन्होंने इस कदम को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कहा कि अदालत में सच्चाई सामने आएगी. हम लड़ेंगे और जीतेंगे.

मुरारका-विनोद वर्मा को नहीं मिली राहत

इस मामले में कारोबारी कैलाश मुरारका और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने भी खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए आवेदन दिया था, जिसे सेशन कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं. इस तरह से केस में भूपेश बघेल के अलावा कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं. वहीं, एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने केस सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी.