दिल्ली सरकार एक बार फिर सभी विधायकों को उनके विधायी और निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े कामों में मदद करने के लिए 100 से ज्यादा युवा फेलो नियुक्त करने जा रही है। इस संबंध में तैयारी भी शुरू कर दी गई है। पिछले अनुभव के मुताबिक, फेलो नियुक्ति का मुद्दा उपराज्यपाल कार्यालय और दिल्ली की पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के बीच बड़ा विवाद का कारण बना था। अब नई सरकार इसे लागू करने के लिए पूर्व योजना और नियमों के अनुरूप प्रक्रिया सुनिश्चित कर रही है।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इस संबंध में तैयारी शुरू कर दी गई है। दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ये फेलो केवल विधायकों की मदद ही नहीं करेंगे, बल्कि सदन और उसकी कमेटियों के विधायी कामकाज से जुड़े रिसर्च कार्यों में भी योगदान देंगे। उन्होंने बताया कि इसके लिए जरूरी नियम और मंजूरी की फाइल आगे बढ़ा दी गई है।

हर विधायक को मिलेगा एक फेलो

सूत्रों के अनुसार, 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के 48 और आम आदमी पार्टी के 22 विधायक हैं। सभी 70 निर्वाचन क्षेत्रों में हर विधायक को एक फेलो दिया जाएगा। हर फेलो को मासिक स्टाइपेंड के तौर पर तय रकम भी दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले युवा ही फेलो और असिस्टेंट फेलो के तौर पर नियुक्त किए जाएंगे। इन फेलो को विधायकों और दिल्ली विधानसभा सचिवालय के काम दिए जाएंगे, ताकि निर्वाचन क्षेत्र और विधानसभाई कार्यों में प्रभावी और तेज़ सहायता मिल सके।

2023 में LG के निर्देश पर हटाए गए थे 116 फेलो

गौरतलब है कि जुलाई 2023 में तत्कालीन ‘आप’ सरकार के तहत दिल्ली असेंबली रिसर्च सेंटर में काम करने वाले 116 फेलो को एलजी के निर्देश पर हटा दिया गया था। इन्हें हटाने की वजह यह बताई गई कि इन फेलो की नियुक्ति एलजी की मंजूरी के बिना की गई थी। साथ ही यह भी दावा किया गया कि नियुक्ति के समय आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया था। इस मुद्दे ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली ‘आप’ सरकार बनाम एलजी और BJP के बीच जबर्दस्त जुबानी जंग छेड़ दी थी।

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