पटना। बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।

उच्चस्तरीय कमेटी का गठन

इस दिशा में एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है, जो मौजूदा व्यवस्था, डॉक्टरों की सेवाओं और मरीजों की सुविधाओं का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी का नेतृत्व निदेशक प्रमुख रेखा झा और पीएमसीएच अधीक्षक करेंगे। सदस्यों में एनएमसीएच प्राचार्य, BASA अध्यक्ष व महासचिव और IGIMS नेत्र विभाग के HOD शामिल हैं।

सात निश्चय-3 के तहत नीति

नई नीति तैयार करते समय “सात निश्चय-3” के तहत “सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन” की अवधारणा पर ध्यान दिया जाएगा। इसका लक्ष्य है कि आम जनता को सरकारी अस्पतालों में सस्ती, भरोसेमंद और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

अस्पतालों की विशेष जांच

राज्यभर में विशेष निरीक्षण दलों का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर टीमें मेडिकल कॉलेज, सदर, अनुमंडलीय अस्पताल, PHC, CHC और APHC का निरीक्षण करेंगी।

दलालों पर सख्ती

सरकार ने दलालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आदेश दिया है, जो मरीजों को निजी अस्पताल और जांच केंद्रों में गुमराह करते हैं।

जवाबदेही सुनिश्चित

जिलाधिकारियों को निरीक्षण और कार्रवाई की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।