ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने में हजारों-लाखों करोड़ रुपये का निवेश करना शुरू कर दिया है. फाइटर जेट से लेकर मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम और इंटरसेप्‍टर्स जैसे वेपन सिस्‍टम डेवपल किए जा रहे हैं. इसके अलावा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस ड्रोन, वॉरशिप, एयरक्राफ्ट कैरियर आदि भी विकसित किए जा रहे हैं. S-400 से लेकर आकाशतीर जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम ने अपनी क्षमता का परिचय दिया था, जिसे देखकर दुश्‍मन भी भौंचक्‍का रह गया था. Su-30MKI को अस्त्र Mk1 और रैम्पेज मिसाइलों के साथ उड़ान भरते देखना इस बात का प्रमाण है कि भारत की वायु शक्ति न केवल मजबूत हो रही है, बल्कि हर गुजरते साल के साथ अधिक स्वदेशी और आत्मनिर्भर भी बनती जा रही है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने उन वेपन सिस्‍टम्‍स से दुनिया को रूबरू कराया, जिसके बारे में पहले से शायद को ही किसी को जानकारी थी.चीन और पाकिस्‍तान जैसे पड़ोसियों की तभी से ही खराब है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस महाबली ने अपनी ताकत से सबको चौंकाया अब उसकी ताकत को और बढ़ा दिया गया है.

पहलगाम टेररिस्‍ट अटैक के बाद इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज ने पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्‍हें ध्‍वस्‍त कर दिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल और Su-30MKI जैसे फाइटर जेट्स अहम भूमिका निभाई थी. अब उसी Su-30MKI लड़ाकू विमान की ताकत को दोगुनी की गई है. इस फाइटर जेट में अस्‍त्र MK1 जैसी देसी एयर-टू-एयर मिसाइल को भी इंटीग्रेट किया गया है.

भारतीय वायुसेना (IAF) ने हाल ही में एक दुर्लभ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दृश्य साझा किया है, जिसमें सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान को स्वदेशी अस्त्र (Astra Mk1) एयर-टू-एयर मिसाइल, रैम्पेज (Rampage) एयर-टू-लैंड गाइडेड मिसाइल और R-73 शॉर्ट रेंज मिसाइलों के साथ पूर्ण ऑपरेशनल कॉन्फ़िगरेशन में देखा गया.

हाल ही में मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि रैम्पेज (Rampage) एयर-टू-लैंड गाइडेड मिसाइल का इस्तेमाल पाकिस्तान वायुसेना के एक एयरबेस पर हमले में किया गया था. लगभग 250 किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल दुश्मन के वायु रक्षा कवच से बाहर रहते हुए हाई-वैल्‍यू टार्गेट्स वाले लक्ष्यों जैसे रनवे, हैंगर, रडार स्टेशन और कमांड सेंटर पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है.

Su-30MKI जैसे मुख्यधारा के लड़ाकू विमान पर ऑपरेशनल लोडआउट में देखना यह साबित करता है कि स्वदेशी हथियार प्रणालियां अब केवल दस्तावेजों और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक युद्ध क्षमता का हिस्सा बन चुकी हैं. Su-30MKI लंबे समय से भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, यह दृश्य भारत की उभरती वायु युद्ध नीति की एक झलक भी पेश करता है, जिसमें विदेशी प्लेटफॉर्म्स को स्वदेशी हथियारों से लैस कर एक अधिक आत्मनिर्भर और लचीली सैन्य शक्ति तैयार की जा रही है. Su-30MKI पर अस्त्र और रैम्पेज का यह संयोजन आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखता है.

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