Indian Rupee Record Low: गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 92.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. डॉलर में मजबूती और एशियाई मुद्राओं में कमजोरी की वजह से रुपये पर दबाव देखा गया. रुपया 91.99 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 91.78 पर बंद हुआ था.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली. फेड ने माना है कि महंगाई अभी ज्यादा है और लेबर मार्केट मजबूत बना हुआ है. इसके बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी आई है.
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रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?
ट्रेडर्स का कहना है कि कमजोर पूंजी प्रवाह और बाजार में बढ़ती चिंता के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है. सिंगापुर स्थित एक हेज फंड मैनेजर के अनुसार बाजार पहले से ही NDF मैच्योरिटी को ध्यान में रख रहा है. आने वाले समय में स्टॉप लॉस का दौर शुरू हो सकता है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर रुपया 92 के स्तर को पार करता है तो क्या भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI इसमें दखल देगा या रुपये को और गिरने देगा.
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वैश्विक डॉलर की मजबूती
अमेरिकी डॉलर को ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी से सपोर्ट मिल रहा है. फेडरल रिजर्व के संकेतों से साफ है कि महंगाई अभी नियंत्रण में नहीं है और रोजगार की स्थिति मजबूत बनी हुई है.
हालांकि फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने रेट कट को लेकर कोई साफ संकेत नहीं दिया, लेकिन मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती महंगाई कम होने के सबूत पर निर्भर करेगी. यह 2026 के अंत तक देखने को मिल सकता है. जून और सितंबर को संभावित रेट कट का समय माना जा रहा है.
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एशिया पर असर
रुपये की गिरावट एशिया के दूसरे देशों की मुद्राओं में कमजोरी को भी दिखाती है. बढ़ती अमेरिकी यील्ड के चलते एशियाई मुद्राएं दबाव में हैं. निवेशक घरेलू और वैश्विक संकेतों को देखते हुए सतर्क बने हुए हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
कमजोर रुपया आयात को महंगा बना सकता है. इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. हालांकि निर्यात को इससे फायदा हो सकता है क्योंकि भारतीय सामान विदेशों में सस्ता पड़ता है. आने वाले दिनों में बाजार की नजर RBI के कदम और वैश्विक हालात पर बनी रहेगी.
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क्या महंगा होगा और किसे फायदा होगा?
आयात: भारत कच्चा तेल, कोयला, रसायन, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, उर्वरक, वनस्पति तेल, सोना, कीमती पत्थर और स्टील का आयात करता है. कमजोर रुपये से ये सभी चीजें महंगी हो सकती हैं. इससे ईंधन, मोबाइल पार्ट्स, गाड़ियां और घरेलू उपकरण महंगे हो सकते हैं.
विदेश में पढ़ाई: विदेश में पढ़ने वाले छात्रों को ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे.
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विदेश यात्रा: कमजोर रुपये के कारण विदेशी यात्रा महंगी हो जाती है क्योंकि डॉलर के बदले ज्यादा रुपये देने पड़ते हैं.
रेमिटेंस
विदेश में रहने वाले NRI को फायदा होता है क्योंकि हर डॉलर के बदले उन्हें ज्यादा रुपये मिलते हैं.
निर्यात: एक्सपोर्टर्स को कमजोर रुपये से फायदा हो सकता है. हालांकि जो कंपनियां आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं, उनका मुनाफा कम हो सकता है. टेक्सटाइल जैसे सेक्टर को ज्यादा फायदा मिलता है क्योंकि इनकी आयात पर निर्भरता कम होती है.
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ताजा व्यापार आंकड़े
दिसंबर 2025 में भारत का आयात 8.7% बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया. इससे व्यापार घाटा 25.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया. कच्चे तेल का आयात करीब 6% बढ़कर 14.4 अरब डॉलर रहा. वहीं चांदी का आयात लगभग 80% बढ़कर 758 मिलियन डॉलर हो गया. हालांकि सोने का आयात 12% घटकर 4.13 अरब डॉलर रहा.
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