दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एक अहम आदेश में अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी बिलाल हुसैन को दी गई जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी आरोपी के अवैध अप्रवासी होने के आधार पर उसे अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बिलाल हुसैन ने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है, न ही उसने जमानत पर रहते हुए अपनी स्वतंत्रता का कोई दुरुपयोग किया है। ऐसे में जमानत रद्द करने का कोई ठोस आधार सामने नहीं आता।
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का भारत में अवैध रूप से रहना एक अलग कानूनी पहलू है, लेकिन जब तक जमानत की शर्तों का पालन किया जा रहा है, तब तक उसे सिर्फ इस आधार पर जेल में बंद नहीं रखा जा सकता। गौरतलब है कि बिलाल हुसैन 2024 में फतेहपुर बेरी थाने में दर्ज एक एफआईआर के मामले में आरोपी है। दिल्ली पुलिस ने उसे 28 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे अदालत से जमानत मिली थी।
एडिशनल सेशंस जज गौरव गुप्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी ठोस तथ्य या सामग्री मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने जमानत पर रहते हुए अपनी आज़ादी का दुरुपयोग किया है या जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है।
‘अनिश्चितकाल तक कस्टडी में नहीं रखा जा सकता’
एडिशनल सेशंस जज गौरव गुप्ता ने 28 जनवरी को दिए अपने आदेश में कहा, “केवल इस आधार पर कि आरोपी एक अवैध अप्रवासी है, उसे अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। इस स्टेज पर आरोपी को दी गई जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता है।” अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी तथ्य या सामग्री सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया हो या जमानत पर रहते हुए अपनी आज़ादी का दुरुपयोग किया हो। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में कोई नया तथ्य या ठोस सबूत सामने आता है, जिससे आरोपी को कस्टडी में लेना जरूरी हो, तो जांच एजेंसी या प्रॉसिक्यूशन नई अर्जी दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा।
24 नवंबर, 2025 को मिली थी जमानत
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 24 नवंबर 2025 को अभियुक्त बिलाल हुसैन को जमानत प्रदान की थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने जमानत रद्द करने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बिलाल हुसैन एक बांग्लादेशी नागरिक है, जिसने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया। आरोप है कि उसने आधार कार्ड समेत भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल कर रखे थे।
प्रॉसिक्यूशन का दावा है कि आरोपी की निशानदेही पर अलग-अलग लोगों के नाम से कई आधार कार्ड और पैन कार्ड बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, उस पर यह भी आरोप है कि वह बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत लाने और उनके लिए भारतीय पहचान पत्र बनवाने के नेटवर्क में शामिल था।
दिल्ली की साकेत कोर्ट में अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी बिलाल हुसैन की जमानत से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों ने कई अहम बातें रखी हैं। जांच अधिकारी के मुताबिक, आरोपी के पास से बरामद आधार कार्ड का वेरिफिकेशन अभी लंबित है, क्योंकि इस संबंध में UIDAI से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है। पुलिस के अनुसार, बिलाल हुसैन को भारत-बांग्लादेश सीमा अवैध रूप से पार करते समय गिरफ्तार किया गया था। उसकी निशानदेही पर बांग्लादेशी नागरिकों के नाम से कई आधार कार्ड, पांच पैन कार्ड और बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं।
जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया था कि आरोपी का भाई अनीश शेख अब तक फरार है और उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना था कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है, तो उसके कोर्ट की कार्यवाही से फरार होने और अन्य वॉन्टेड आरोपियों को सतर्क करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अभियोजन पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि जिस तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया, वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल और उन्हें बनवाने का नेटवर्क देश की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
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