राकेश चतुर्वेदी/शिखिल ब्यौहार, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। यूजीसी (UGC) के नए बिल को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान सामने आया हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई से केंद्र की मोदी सरकार को खास संदेश दिया हैं। आइए जानते है आखिर उन्होंने सरकार से क्या कहां हैं और क्या मांग की है..?

धीरेंद्र शास्त्री ने कही ये बात

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर प्रतिक्रिया दी हैं। मुंबई में उन्होंने भारत सरकार को संदेश देते हुए कहा कि भारतीयों को बांटा न जाए। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि क्या क्षत्रिय, क्या ब्राहमण, क्या वैश्य, एक विषय बहुत चल रहा है। असामानता भारत में नहीं होनी चाहिए। भारत में समानता ही होनी चाहिए। हम सब एक हैं। भारत में कोई न अगड़ा हो, न विछड़ा हो, भारत में केवल भारतीय हो यही प्रार्थना है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार से प्रार्थना है कि भारतीयों को बांटा न जाए जोड़ा जाए, हम सब हिंदू एक हैं। एकता के लिए हमने सात समाज की बेटियों का विवाह करवाया है।

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भोपाल में सवर्ण समाज मनाएगा जश्न

इधर, यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद सवर्ण समाज में जश्न का माहौल है। राजधानी भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर शाम साढ़े चार बजे जश्न मनाया जाएगा। ढोल की थाप पर सवर्ण समाज के लोग झूमेंगे। साथ ही जमकर आतिशबाजी भी की जाएगी। वहीं दलित नेता दामोदर यादव ने कहा कि यूजीसी में कुछ ऐसे नियम बना दिए थे जो कॉलेज और यूनिवर्सिटी के अंदर एससी-एसटी ओबीसी के न हो सके। जातिगत भेदभाव ना हो सके, कॉलेज में यूनिवर्सिटी में जाति देखकर नंबर काम ज्यादा किए जाते हैं, उनके साथ रैगिंग की जाती है।

EWS का आरक्षण खत्म होना चाहिए।

दलित नेता दामोदर ने आगे कहा कि जातिगत भेदभाव जातिगत किया जाता है। इसलिए अभी सरकार ने नियम परिवर्तन किया। केंद्र ने कुछ हद तक सुरक्षा कवच देने का काम किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। बाबा साहब की स्टैचू ग्वालियर में लगेगी। हमारी मांग है कि यूजीसी के नियमों को जारी रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट से कहना चाहते हैं यदि ऐसा नहीं तो ईडब्ल्यूएस का आरक्षण खत्म होना चाहिए।

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क्यों मचा बवाल ?

गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को नया नियम जारी किया था। यह रूल 2012 में लागू किए गए नियमों की जगह जारी किया गया। 2012 के नियमों में ‘भेदभाव’ की बात की गई थी, वहीं 2026 में संशोधित नियमों में भेदभाव की परिभाषा में ‘जाति‑आधारित भेदभाव’ को जोड़ा गया, जिससे देशभर में बवाल मच गया।

19 मार्च को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मचे हंगामे के बीच गुरुवार (29 जनवरी 2026) को UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी हैं। साथ ही कमेटी बनाने का निर्देश दिया हैं। फिलहाल 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।

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