हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पतालों का मामला अब सीधे हाईकोर्ट की सख्त निगरानी में आ गया है। बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने सुनवाई हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पर ही सवाल खड़े हो गए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) माधव हासानी खुद कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि अवैध अस्पतालों की जांच के लिए 8 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में डॉ अभिषेक निगम, डॉ वीरेंद्र राजगीर, डॉ निर्मला अखंड, डॉ हिमांशु सुमन, मयूरी जाट, शैफाली बर्डे, दारासिंह वास्केल और पंकज वाडबूदे शामिल थे। लेकिन चौंकाने वाली बात ये रही कि CMHO खुद अपनी बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं निकले।
कोर्ट को बताया गया कि कमेटी के काम पर सवाल हैं और सदस्यों को शोकॉज नोटिस जारी करने की बात कही गई है। यानी जांच हुई, रिपोर्ट बनी, लेकिन विभाग को ही भरोसा नहीं! उधर याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल, जयेश गुरनानी और आदित रघुवंशी ने कोर्ट को बताया कि पूरे मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है। उनका आरोप था कि कई अस्पताल फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों के सहारे संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर कार्रवाई के बजाय समय मांग रहे हैं।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सख्त रुख दिखाया। CMHO को साफ निर्देश दिए गए कि दो हफ्ते के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। साथ ही नगर पालिका निगम इंदौर को भी जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अब सवाल सीधा है कि जब जांच करने वाली कमेटी पर ही विभाग को भरोसा नहीं, तो अब तक शहर में कितने अवैध अस्पताल मरीजों की जान से खेलते आ रहे है?
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