प्रयागराज. मौनी अमावस्या पर संगम क्षेत्र में हुए विवाद को लेकर अब माघ मेला प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने के लगा हुआ है. उनके माघ मेला परिसर छोड़ने के बाद मेला प्राधिकरण के बड़े-बड़े अफसर संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं. अधिकारी चाहते हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ पूर्णिमा के अवसर पर संगम स्नान करें.

हालांकि दूसरी तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनके बटुक शिष्यों से मारपीट और अभद्रता करने वाले दोषी अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें. साथ ही उनकी ये भी मांग है कि चारों पीठ के शंकराचार्य के स्नान के लिए प्रोटोकॉल बनाया जाए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शर्तों पर अफसर सहमति भी जता चुके हैं. जिसके बाद अब विवाद सुलझने के आसार दिख रहे हैं.

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बता दें कि 28 जनवरी (बुधवार) को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला परिसर छोड़ दिया था. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वे आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि एक ऐसी घटना घटी, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी, जिससे उनका मन व्यथित हो गया. प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है और यहां से इस तरह लौटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है. उन्होंने कहा कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए आस्था का विषय था. लेकिन इसके बाद भी मौजूदा हालात में उन्होंने मेला छोड़ने का कठिन निर्णय लिया है.

मौनी अमावस्या से शुरू हुआ था विवाद

गौरतलब है कि बीते दिनों मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. श्रद्धालु बड़ी संख्या में डुबकी लगाने के लिए पहुंचे थे. जिसके कारण संगम पर गहमागहमी की स्थिति हो गई थी. इसी बीच ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी संगम पहुंचे थे, लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से प्रशासन ने उन्हें रोक दिया था. प्रशासन ने उनसे रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया था. इस पर उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद शुरू हो गया था. शंकराचार्य ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने संतों के साथ मारपीट की है. उन्होंने कहा है कि जब प्रशासन ने हमें रोका तो हम सहयोग के लिए तैयार थे. जब हम वापस जाने लगे तो पुलिस ने संतों और भक्तों से मारपीट शुरू कर दी थी.