Rupee Record Low Vs Dollar: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. RBI के मुताबिक 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे गिरकर 91.96 पर बंद हुआ. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और दुनिया भर में बढ़ते व्यापारिक तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है.
साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया कमजोर चल रहा है. दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था. अब सिर्फ 30 दिनों के अंदर यह 92 के करीब पहुंच गया है.
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनाव की वजह से निवेशक गोल्ड और डॉलर में ज्यादा निवेश कर रहे हैं.
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रुपये में गिरावट के 3 बड़े कारण
1. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPI लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. जनवरी 2026 के पहले 20 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने करीब 29,315 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं.
जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये के बदले डॉलर खरीदते हैं. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है.
2. ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक तनाव
अमेरिका की ओर से यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी और ग्रीनलैंड विवाद की वजह से दुनिया के बाजारों में डर का माहौल है.
ऐसे समय में निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर और सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और रुपया गिरता है.
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3. मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था और ऊंची ब्याज दरें
अमेरिका में बेरोजगारी दर कम हुई है और वहां की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिका में ब्याज दरें अभी ऊंची रह सकती हैं.
ज्यादा रिटर्न के लिए निवेशक अमेरिकी बॉन्ड और बैंकों में पैसा लगा रहे हैं, जिससे डॉलर और मजबूत हो रहा है.
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रुपये की गिरावट से क्या होगा असर
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आयात पर पड़ेगा. विदेश से आने वाला सामान महंगा होगा. इसके साथ ही विदेश घूमना और पढ़ाई करना भी अब ज्यादा खर्चीला हो जाएगा.
उदाहरण के तौर पर, जब डॉलर 50 रुपये का था, तब 1 डॉलर के लिए 50 रुपये देने पड़ते थे. अब 1 डॉलर के लिए करीब 91 रुपये चुकाने होंगे. इससे विदेश में पढ़ने वाले छात्रों की फीस, रहना और बाकी खर्च काफी बढ़ जाएंगे.
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