पूर्वी दिल्ली में रहते हैं और सरकारी कामों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत लेकर आई है। कड़कड़डूमा में खाली पड़ी 12 मंजिला इमारत को अब पूर्वी दिल्ली जिले के ‘मिनी सचिवालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मिनी सचिवालय बनने के बाद पूर्वी दिल्ली के लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों में भटकना नहीं पड़ेगा। एक ही परिसर में कई विभागों के दफ्तर होने से कामकाज आसान, तेज़ और ज्यादा पारदर्शी हो सकेगा।

12 मंजिला इमारत में शिफ्ट होंगे सभी बड़े दफ्तर

कड़कड़डूमा कोर्ट के पास स्थित एमसीडी का ऑफिस कॉम्प्लेक्स, जिसे मूल रूप से पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मुख्यालय के रूप में बनाया गया था, अब पूर्वी दिल्ली जिले का प्रशासनिक केंद्र बनेगा। इस परिसर को मिनी सचिवालय के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां एक ही छत के नीचे जिलाधिकारी (DM), राजस्व अधिकारियों और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े विभागों के दफ्तर मौजूद होंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद आम लोगों को सरकारी कामकाज के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी। प्रशासन का मानना है कि इससे सेवा वितरण अधिक प्रभावी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनेगा।

मेट्रो के पास, 200+ गाड़ियों की पार्किंग

यह इमारत केवल ऊंचाई के लिहाज़ से ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से भी पूरी तरह लैस है। कॉम्प्लेक्स पूरी तरह से वातानुकूलित है और यहां 216 वाहनों की पार्किंग सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा यह मेट्रो स्टेशन के बेहद करीब स्थित है, जिससे आम लोगों के लिए यहां तक पहुंचना आसान होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यालय परिसर 7,132 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इसमें तीन अलग-अलग ब्लॉक बनाए गए हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

बताया जा रहा है कि साल 2022 में दिल्ली के तीनों नगर निगमों के एकीकरण के बाद से यह इमारत खाली पड़ी थी और इसके उपयोग को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं बन पाई थी। इस दौरान इमारत के रखरखाव पर एमसीडी को भारी खर्च उठाना पड़ रहा था, जबकि इसका कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल रहा था। एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, इस इमारत को दिल्ली सरकार को सौंपने या लीज पर देने से निगम को राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही इसके रखरखाव पर होने वाला खर्च भी बचेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से न केवल एमसीडी की आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ेगा, बल्कि खाली पड़ी सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा।

CM और मेयर की मीटिंग के बाद लगेगी अंतिम मुहर

बताया जा रहा है कि साल 2022 में दिल्ली के तीनों नगर निगमों के एकीकरण के बाद से यह इमारत खाली पड़ी हुई थी और इसके उपयोग को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बन पाई थी। इस अवधि में इमारत के रखरखाव पर एमसीडी को भारी खर्च उठाना पड़ रहा था, जबकि इससे कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल रहा था।

एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, इमारत को दिल्ली सरकार को सौंपने या लीज पर देने से निगम को राजस्व मिलेगा, वहीं इसके रखरखाव पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से न केवल एमसीडी की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि लंबे समय से खाली पड़ी सार्वजनिक संपत्ति का प्रभावी और उपयोगी इस्तेमाल भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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