दिल्ली में ट्रीटेड पानी की बर्बादी रोकने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़ा कदम उठाया है। अब DDA अपने 100 पार्कों में लगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले ट्रीटेड पानी की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल केवल सिंचाई, बागवानी और पौधरोपण के लिए ही किया जाए और कहीं भी इसका दुरुपयोग या बर्बादी न हो। DDA ने इसके लिए फर्मों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) मंगाए हैं। चयनित फर्में DDA के पार्कों में ऑटोमेशन आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम इंस्टॉल करेंगी।

DDA अधिकारियों के अनुसार, इन झीलों को पार्कों में लगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले ट्रीटेड पानी से भरा जाता है। रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि झीलों में डाला जा रहा पानी मानकों के अनुरूप और सुरक्षित हो।

यह ऑटोमेशन सिस्टम पानी की गुणवत्ता के कई महत्वपूर्ण मानकों की निगरानी करेगा, जिनमें शामिल हैं. बायोलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD), केमिकल ऑक्सिजन डिमांड (COD), टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (TSS), pH वैल्यू, पानी की मात्रा (Flow/Quantity) DDA का कहना है कि इससे यह साफ तौर पर पता चल सकेगा कि STP पानी को किस हद तक साफ कर रहे हैं, उनकी वास्तविक क्षमता क्या है, और वे मानकों पर खरे उतर रहे हैं या नहीं। इस पहल से STP के लिए उपयुक्त वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी की पहचान भी की जा सकेगी, खासतौर पर ऐसी टेक्नोलॉजी की, जिसकी क्षमता 100 केएलडी (किलोलीटर प्रति दिन) हो।

एजेंसी की हो रही तलाश

DDA अधिकारियों के अनुसार, चयनित एजेंसी केवल मॉनिटरिंग सिस्टम इंस्टॉल ही नहीं करेगी, बल्कि विभिन्न ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी का विस्तृत मूल्यांकन भी करेगी। इस मूल्यांकन में प्रति केएलडी (किलोलीटर प्रति दिन) लागत, जमीन की आवश्यकता, ऑपरेशन और मेंटेनेंस कॉस्ट, बिजली की खपत, ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता, और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे अहम पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

इस पहल से क्या फायदा?

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) इस समय राजधानी में करीब 16,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन स्पेस का प्रबंधन कर रहा है। इसमें 10,400 एकड़ में फैले 729 पार्क, लगभग 21,000 एकड़ में विकसित बायोडायवर्सिटी पार्क, और करीब 2,500 एकड़ यमुना फ्लड प्लेन के पास विकसित ग्रीन स्पेस शामिल हैं।

DDA अधिकारियों के मुताबिक, इन ग्रीन एरिया को सिंचित करने और झीलों को पुनर्जीवित करने के लिए बड़ी संख्या में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए गए हैं। फिलहाल 100 बड़े पार्कों में 10 केएलडी से लेकर 1000 केएलडी क्षमता वाले STP की पहचान की गई है। ये एसटीपी 2020 से 2024 के बीच लगाए गए थे और इनमें नेबरहुड पार्क, डिस्ट्रिक्ट पार्क, चिल्ड्रन पार्क और बड़े रिक्रिएशनल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।

हालांकि, इन STP की अभी तक कोई रियल टाइम मॉनिटरिंग नहीं हो रही है, जिसकी वजह से किसी तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी समस्या का पता काफी देर से चलता है। अधिकारी बताते हैं कि जब तक समस्या सामने आती है, तब तक कई बार रिवाइव की गई झीलों को नुकसान पहुंच चुका होता है।

अब प्रस्तावित ऑनलाइन रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से पानी की गुणवत्ता में जरा सी भी गिरावट आते ही तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इससे समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे और झीलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा, ट्रीटेड पानी की बर्बादी रुकेगी, और पार्कों में जल प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी होगा। DDA का मानना है कि यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और शहरी हरित विकास की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है, जिससे दिल्ली के ग्रीन स्पेस को लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रखा जा सकेगा।

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