शिखिल ब्यौहार, भोपाल। धार्मिक नगरी उज्जैन में साधु-संतों और मंदिर के पुजारियों ने गैर-हिंदुओं के मंदिर प्रवेश को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संतों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिस तरह मक्का-मदीना में हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है, उसी तर्ज पर भारतीय मंदिरों और मठों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण पाबंदी लगनी चाहिए।

हमारे पवित्र स्थलों पर आने की मनाही नहीं

उज्जैन में महामंडलेश्वर शैलेशानंद महाराज जूना अखाड़ा ने यह मांग उठाई है। मांग पर साधु सन्यासी समिति के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने कहा कि मस्जिदों में वही जाता है जिसकी आस्था वहां होगी। यदि मूर्ति पूजन समेत भगवान में ग्रंथ, शास्त्र, तिलक शिखा में आस्था नहीं उनका मंदिरों समेत अन्य सनातनी धार्मिक स्थलों पर नहीं आना चाहिए। यदि आते हैं तो यह भी संशय का विषय होगा। हमारे पवित्र स्थलों पर आने की मनाही नहीं, लेकिन आने वाले व्यक्ति की पूरी आस्था और संस्कार फिर सनातनी होना चाहिए।

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विधर्मी मानसिकता का आरोप

संतों का कहना है कि अन्य धर्मों के लोग आस्था के कारण नहीं, बल्कि धर्म के साथ छेड़छाड़ करने की मानसिकता से मंदिरों में आते हैं। पुजारियों के अनुसार, मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य है। स्थानीय अखाड़ों और प्रमुख मंदिरों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से इस मामले में सख्त नियम बनाने की मांग की है। संत समाज का तर्क है कि जब अन्य धर्मों के स्थलों पर मर्यादा के नाम पर प्रतिबंध मान्य हैं, तो हिंदू धर्मस्थलों पर भी ‘प्रवेश वर्जित’ के बोर्ड लगाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।

साधु संतो के समर्थन पर सियासत

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉक्टर विक्रम चौधरी ने कहा- धर्म क्या होता है, यह आरएसएस नहीं जानती। RSS की भाषा बोलने वाले हिंदू धर्म की समग्रता को संकीर्ण अर्थों में डाल देना चाहते हैं। सनातन धर्म का जिसके दरवाजे पूरी मानवता के लिए पूरे विश्व के लिए खुले हैं। उसमें हमने तो कभी किसी को गैर हिंदू नहीं माना। सुप्रीम कोर्ट कहता है कि हिंदू धर्म है वह एक जीवन पद्धति है। तो जीवन पद्धति के रास्ते तो आप बंद नहीं कर सकते। हमारा धर्म किसी एक भगवान या एक किताब पर भी आधारित नहीं है। हम हर जीव में ईश्वर को देखते हैं तो फिर हम किसी मनुष्य में गैर हिंदू कैसे देख सकते हैं। कुल मिलाकर यह भाजपा का षड्यंत्र है। यह सब उनके एजेंट बन बयान दे रहे हैं। जनता के आंखों में धूल झोंकने का काम करते हैं। धर्म को ऐसे बयान देने वालों से खतरा है।

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