मिडिल ईस्ट के आसमान पर एक बार फिर युद्ध के काले बादल गहरा गए हैं. सुपरपावर अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच तनाव अब उस चरम बिंदु पर पहुंच चुका है, जहां से वापसी का रास्ता केवल विध्वंसक युद्ध की ओर जाता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मिल रही कड़क चेतावनियों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की फौज ने न केवल आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है, बल्कि अपनी मिसाइलों का टारगेट भी लॉक कर दिया है. ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर अमेरिका की ब्रिटेन, फ्रांस, इजरायल और मिडिल ईस्ट के चार मुल्कों के साथ बातचीत हो चुकी है. अमेरिका ने हमले का ब्लूप्रिंट सहयोगी देशों को सौंप दिया हैं. 

ईरान के करीब अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमानों की तैनाती हो चुकी हैं. डिफेंस एक्सपर्ट अमेरिकी सेना की तैनाती को ईरान पर सैन्य एक्शन से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं ईरान ने भी जमीन, हवा और समुद्र… तीनों मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई की व्यापक रणनीति तैयार कर ली है.

अमेरिकी मीडिया में छपी रिपोर्ट्स में यही दावा किया गया है कि ईरान पर किसी भी वक्त हमला हो सकता है. ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर अमेरिका की ब्रिटेन, फ्रांस, इजरायल और मिडिल ईस्ट के चार मुल्कों के साथ बातचीत हो चुकी है. अमेरिका ने हमले का ब्लूप्रिंट सहयोगी देशों को सौंप दिया हैं. 

सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने जमीन, हवा और समुद्र… तीनों मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई की व्यापक रणनीति तैयार कर ली है. ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने मिसाइलों, ड्रोन और नौसैनिक ताकत की तैनाती तेज कर दी है. ईरानी नेतृत्व का दावा है कि उसकी उंगली ट्रिगर पर है और अमेरिकी हमले की स्थिति में पलटवार तय है.

ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ताजा बयान की टाइमिंग को देखें तो मतलब बड़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है अगर ईरान के सुप्रीम लीडर सरेंडर करते हैं तभी अमेरिका रुकेगा. लेकिन ईरान का रुख अमेरिका के सामने झुकने का नहीं बल्कि आरपार की जंग लड़ने का है.

रक्षा मंत्री ने खुल्लम खुल्ला ऐलान कर दिया है. इधर ट्रंप का आदेश आएगा, उधर ईरान पर सैन्य एक्शन शुरू हो हो जाएगा. ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने पूरी तैयारी कर ली है. अमेरिकी सेना के पूर्व सैन्य अफसर का दावा है कि ईरान पर सैन्य एक्शन की तारीख, ईरान के ठिकाने, ट्रंप तय कर चुके हैं.

अमेरिका ने रणनीतिक रूप से ईरान को चारों ओर से घेर लिया है और हाल ही में उसका एक और डिस्ट्रॉयर युद्धपोत मध्य-पूर्व पहुंच चुका है. क्षेत्र में अमेरिका के 30 से 40 हजार सैनिक पहले से ही अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर तैनात हैं. 

सीरिया, कुवैत, ओमान, यूएई, बहरीन, सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, इराक और तुर्किए में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डे इस घेरे को और मजबूत करते हैं, जबकि कतर में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना मौजूद है. इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान को भेजी गई शर्तें अगर नहीं मानी गईं, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शासकों को तीन शर्तें भेजीं :-

इनमें पहली शर्त है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से छोड़े और अपनी यूरेनियन एनरिचमेंट क्षमताओं को खत्म कर दे. उसके पास जितना बम बनाने लायक यूरेनियम है, वो अमेरिका को सौंप दे.

दूसरी शर्त ये है कि ईरान तत्काल मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने मिलिशिया, जैसे हमास, हूती विद्रोही और लेबनान के हिज्बुल्लाह को समर्थन देना बंद करे.

तीसरी शर्त है कि ईरान अपने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को बंद करे. और ये तीनों शर्तें ऐसी हैं, जिसे ईरान किसी भी हाल में मान नहीं सकता है. 

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