दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन अपराधों पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब अश्लील सामग्री, फोटो-वीडियो मॉर्फिंग और ऑनलाइन छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं को सामान्य साइबर थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दिल्ली पुलिस अपनी ‘स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन’ (SPUWAC) को डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह सशक्त करने की तैयारी में है।
इस नई व्यवस्था के तहत SPUWAC में साइबर एक्सपर्ट्स की तैनाती, तेज़ जांच और पीड़ितों के लिए संवेदनशील व सुरक्षित शिकायत प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन अपराधों से तुरंत राहत और प्रभावी न्याय दिलाना है।
ठगी की भीड़ में दब जाते थे संगीन मामले
अभी तक महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की शिकायतें भी दिल्ली के उन्हीं 15 साइबर थानों में दर्ज होती थीं, जहां ऑनलाइन ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले दर्ज होते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, साइबर फ्रॉड के मामलों की संख्या इतनी ज्यादा है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों पर उतना ध्यान नहीं जा पाता। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हजारों वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों के बीच यौन प्रकृति के साइबर अपराधों को वह प्राथमिकता नहीं मिल पा रही थी, जिसकी उन्हें जरूरत है, इसी वजह से अब SPUWAC को डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए अलग से सशक्त किया जा रहा है।
SPUWAC को मिलेगी ‘सुपर पावर’
प्रस्ताव के अनुसार, अब SPUWAC ऑनलाइन यौन अपराधों की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी। अब तक यह यूनिट मुख्य रूप से दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे मामलों को देखती थी, लेकिन नए बदलाव के बाद यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले यौन अपराधों से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई करेगी। नई व्यवस्था के तहत SPUWAC केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि FIR दर्ज करने, जांच करने और अदालत में मुकदमा लड़ने की पूरी प्रक्रिया खुद संभालेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को अलग-अलग यूनिट्स के बीच न भटकना पड़े और उन्हें तेज़, संवेदनशील और प्रभावी न्याय मिल सके।
डरा रहे हैं ऑनलाइन क्राइम के आंकड़े
आंकड़े बताते हैं कि यह बदलाव क्यों जरूरी है। अगस्त 2023 से अब तक SPUWAC को अमेरिका की संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी 26 हजार से अधिक साइबर टिपलाइन रिपोर्ट्स मिली हैं। लेकिन मौजूदा सिस्टम की जटिलताओं के चलते इनमें से सिर्फ 203 मामलों में ही FIR दर्ज हो सकी।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2024 में जहां चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े 136 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 63 रह गई। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरावट अपराध कम होने का संकेत नहीं, बल्कि जांच और कार्रवाई में ढिलाई की ओर इशारा करती है।
हर जिले में बनेगा स्पेशल ‘सुरक्षा चक्र’
प्रस्ताव के तहत सिर्फ पुलिस हेडक्वार्टर ही नहीं, बल्कि दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों में SPUWAC का एक-एक डेडिकेटेड डिपार्टमेंट बनाने की योजना है। इन इकाइयों में विशेष रूप से प्रशिक्षित जांच अधिकारी, साइबर फॉरेंसिक सपोर्ट और ट्रेंड स्टाफ तैनात किया जाएगा। ये टीमें ऑनलाइन स्टॉकिंग, डिजिटल अब्यूज, मॉर्फिंग और अश्लील कंटेंट से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ हैंडल करेंगी, ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिले और मामलों की जांच प्रभावी ढंग से हो सके।
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