देहरादून। उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को और सख्त बनाते हुए राज्य सरकार ने बड़ा संशोधन किया है। सरकार ने जबरन, धोखाधड़ी या दबाव से शादी और लिव-इन संबंध बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान जोड़ा है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद UCC (संशोधन) अध्यादेश 2026 तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। अब जबरन या धोखे से रिश्ते में आने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। 

UCC लागू होने के एक साल के अनुभव के बाद सरकार ने कानून में मुख्य बदलाव किये हैं

  • जबरन या धोखाधड़ी से शादी/लिव-इन: बल, दबाव, लालच या फर्जी जानकारी देकर रिश्ता बनाने पर अधिकतम 7 साल की जेल और जुर्माना।
  • दोहरे रिश्ते पर सख्ती: अगर कोई पहले से शादीशुदा या लिव-इन में है और दूसरा रिश्ता बनाता है, तो भी 7 साल तक की सजा।
  • नाबालिग के साथ लिव-इन: वयस्क अगर नाबालिग के साथ लिव-इन में पाया गया, तो 6 महीने तक की जेल, 50 हजार रुपये तक जुर्माना, या दोनों। जुर्माना न चुकाने पर एक महीने अतिरिक्त कैद।
  • झूठी जानकारी या पहचान छिपाना: शादी/लिव-इन के लिए गलत जानकारी देना अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध। पहचान छिपाने पर शादी रद्द हो सकती है।
  • अवैध तलाक या पुनर्विवाह पर शर्तें: अवैध तलाक पर 3 साल तक जेल और जुर्माना। पुनर्विवाह से पहले अवैध शर्तें थोपने पर भी 3 साल जेल और 1 लाख तक जुर्माना।
  • प्रशासनिक सुधार: अपर सचिव अब सक्षम अधिकारी। रजिस्ट्रार जनरल को रजिस्ट्रेशन रद्द करने की शक्ति। लिव-इन खत्म होने पर समाप्ति प्रमाण पत्र जारी होगा।

  एक साथ दो लिव-इन पर भी सख्ती

UCC संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से लिव-इन संबंध में रहते हुए किसी अन्य के साथ दूसरा लिव-इन संबंध बनाता है, तो उस पर भी सात साल तक की जेल का प्रावधान होगा। सरकार का कहना है कि ये संशोधन UCC को ज्यादा स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाएंगे। रिश्तों में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। एक साल में UCC से महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत हुए हैं, और अब ये बदलाव कानून को और मजबूत करेंगे।