Inside Story of Silver Crash: कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है. चांदी की कीमतों में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. पिछले कुछ हफ्तों से रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही चांदी की चमक एक झटके में फीकी पड़ गई. जिस धातु ने निवेशकों को मुनाफा कमाकर दिया था, उसी ने सिर्फ 24 घंटे में उनकी उम्मीदें तोड़ दीं. यह चांदी के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट में से एक मानी जा रही है. सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई. सोने के वायदा भाव करीब 9 प्रतिशत तक नीचे कारोबार करते दिखे.
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एक दिन में 96,000 रुपये की भारी गिरावट
शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे निवेशक हैरान रह गए. मार्च एक्सपायरी वाली चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 24 प्रतिशत, यानी लगभग एक लाख रुपये प्रति किलो टूट गई.
गिरावट के बाद चांदी का भाव करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गया. यह गिरावट इसलिए भी डराने वाली है क्योंकि चांदी जिस तेजी से ऊपर गई थी, उससे कहीं ज्यादा तेजी से नीचे आ गई.
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1980 की ‘हंट ब्रदर्स’ घटना और आज का बाजार
बाजार के जानकार इस गिरावट की तुलना 1980 के दौर से कर रहे हैं. उस समय चांदी की कीमतों में पहले जबरदस्त उछाल आया था और फिर भारी गिरावट देखने को मिली थी. यह पूरा खेल अमेरिका के दो अरबपति भाइयों, हर्बर्ट हंट और बंकर हंट, जिन्हें हंट ब्रदर्स कहा जाता है, से जुड़ा था.
हंट ब्रदर्स का ‘सिल्वर गेम’ क्या था?
1970 के दशक की शुरुआत में जब अमेरिकी डॉलर का सोने से रिश्ता खत्म हुआ और गोल्ड स्टैंडर्ड हट गया, तब महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई. इसी दौर में हंट ब्रदर्स ने चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर बड़ी मात्रा में खरीदना शुरू किया.
धीरे-धीरे यह निवेश सट्टेबाजी में बदल गया. 1973 से 1979 के बीच हंट ब्रदर्स ने इतनी ज्यादा फिजिकल चांदी और वायदा सौदे खरीद लिए कि दुनिया की कुल चांदी की सप्लाई के करीब एक-तिहाई हिस्से पर उनका कब्जा हो गया. इसका नतीजा यह हुआ कि 1973 में 1.95 डॉलर प्रति औंस की चांदी जनवरी 1980 तक बढ़कर करीब 50 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई.
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27 मार्च 1980: ‘सिल्वर थर्सडे’ का डर
जब अमेरिकी नियामकों को हंट ब्रदर्स की बाजार में हेरफेर की जानकारी मिली, तो नियम सख्त कर दिए गए. मार्जिन के नियम इतने कड़े हो गए कि हंट ब्रदर्स नए सौदे नहीं कर पाए.
27 मार्च 1980 को चांदी की कीमत एक ही दिन में करीब 50 प्रतिशत गिर गई और भाव 11 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया. इस दिन को आज भी ‘सिल्वर थर्सडे’ के नाम से जाना जाता है.
चांदी की कीमतें क्यों गिरीं?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी हमेशा से एक हाई-बिटा कमोडिटी रही है, यानी इसकी कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है. रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव आ गया.
इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए फेडरल रिजर्व चेयरमैन के नाम के ऐलान के बाद डॉलर मजबूत हुआ. मजबूत डॉलर का असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ता है और उनकी मांग कमजोर हो जाती है.
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