चंडीगढ़। पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, राज्य के लोगों और सरकार की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण पर टिकी हैं. पंजाब सरकार ने इस बार केंद्र से ‘विशेष आर्थिक पैकेज’ की पुरजोर मांग की है. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा है, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं का हवाला दिया गया है.

2025 की बाढ़ और सीमा सुरक्षा बनी आधार

पंजाब सरकार ने तर्क दिया है कि साल 2025 में आई प्राकृतिक आपदा (बाढ़) से राज्य को भारी नुकसान हुआ है. वित्त मंत्री चीमा ने प्री-बजट बैठक में कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, जो पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चल रहे तनाव और पिछले साल आई भयानक बाढ़ की ‘दोहरी मार’ झेल रहा है. उन्होंने केंद्र से अपील की है कि पंजाब के वित्तीय तनाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए और तत्काल विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए.

पंजाब सरकार की प्रमुख मांगें (आंकड़ों में)
सरकार के मुताबिक, हालिया बाढ़ से राज्य के 2300 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं, जिससे कुल 12,905 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है. इसकी भरपाई के लिए मदद मांगी गई है.

राज्य ने केंद्र से 7,757 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास फंड (RDF) के बकाए को तुरंत जारी करने की मांग की है. सरकार का कहना है कि फंड रुकने से ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम प्रभावित हो रहा है.

पंजाब में तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए धान की खेती को कम करने की कवायद चल रही है. इसके लिए राज्य ने किसानों को फसल विविधीकरण के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को दोगुना कर 15,000 रुपये प्रति एकड़ करने की मांग की है.
राज्य सरकार का दावा है कि जीएसटी लागू होने के बाद से पंजाब को सालाना लगभग 6,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. चीमा ने मांग की है कि इस घाटे की भरपाई के लिए केंद्र एक स्थायी तंत्र विकसित करे.