दिल्ली में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस वर्ष दिल्ली डिवीजन को 118 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है। राजधानी में अमृत भारत योजना के तहत 13 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य चल रहा है, जिसमें बजट से मिली यह राशि अहम भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही इस वर्ष दिल्ली को दो बड़ी रेलवे परियोजनाएं भी मिलने जा रही हैं। इनमें बिजवासन रेलवे स्टेशन का विकास और यमुना नदी पर बन रहा नया लोहे का रेलवे पुल शामिल है, जिससे यात्री सुविधाओं के साथ-साथ रेल नेटवर्क की क्षमता भी बढ़ेगी।

रेलवे मंत्री अश्वनी वैष्णव ने दिल्ली के लिए जारी रेल बजट की जानकारी देते हुए बताया कि यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में दिल्ली को प्रतिवर्ष बजट से केवल 96 करोड़ रुपये मिलते थे। वहीं वर्ष 2026-27 के लिए दिल्ली को 2711 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। मंत्री ने कहा कि यह राशि यूपीए सरकार के समय दिए जाने वाले बजट से करीब 27 गुना अधिक है, जिससे दिल्ली में रेलवे ढांचे और यात्री सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी।

13 स्टेशनों के पुनर्विकास को रफ्तार मिलेगी

उन्होंने बताया कि इस आवंटित राशि से दिल्ली में चल रहे 13 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों को तेज़ी मिलेगी। इन स्टेशनों का पुनर्विकास कुल 5887 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 में दिल्ली डिवीजन को रेल बजट के तहत 2593 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

रेलवे मंत्री अश्वनी वैष्णव ने यह भी कहा कि वर्तमान में दिल्ली में रेलवे द्वारा कुल 8976 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें नए रेल ट्रैक बिछाने, स्टेशनों का पुनर्विकास और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

दिल्ली को बेहतर कनेक्टिविटी मुहैया करा रहे

मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बताया कि दिल्ली को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से राजधानी से 14 जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस और 8 जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा बीते एक दशक में रेलवे द्वारा दिल्ली में 14 अंडरपास और फ्लाईओवर बनाए गए हैं, जिससे रेल और सड़क यातायात दोनों में सुधार हुआ है। मंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली में अब 100 प्रतिशत रेलगाड़ियां बिजली से संचालित हो रही हैं, जिससे न केवल प्रदूषण में कमी आई है बल्कि ऊर्जा दक्षता भी बढ़ी है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर में भूमिगत ट्रेन दौड़ेंगी

सरकार ने बजट में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इनमें वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर भी शामिल है, जिसका एक हिस्सा पश्चिम बंगाल में भूमिगत होगा। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह परियोजना 40 किलोमीटर लंबे सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रूप में जानी जाती है, जो बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ क्षेत्र है। सिलीगुड़ी गलियारे में भूमिगत रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके साथ ही मौजूदा रेल ट्रैक को चार लेन में विस्तारित करने की भी योजना है, जिससे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m