देहरादून. टिहरी बांध विस्थापित दिलीप कुमार 14 जनवरी से लगातार धरने पर बैठा थे, जिनकी मौत हो गई. इस मामले को लेकर नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर करारा हमला बोला है. यशपाल आर्य ने कहा, उत्तराखंड में “सुशासन” के दावों की असलियत एक बार फिर बेनकाब हो गई है. टिहरी बांध विस्थापित दिलीप कुमार को अपने ही घर के मालिकाना हक़ के लिए 23 वर्षों तक इंतज़ार, फिर लगातार धरना, और अंततः इंसाफ़ की उम्मीद में प्राण त्याग. यह किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि सरकार की असंवेदनशीलता और प्रशासनिक बेरुख़ी का परिणाम है.
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आगे यशपाल आर्य ने कहा, एक टिन शेड में जीवन गुज़ारने को मजबूर विस्थापित, जो 14 जनवरी से लगातार धरने पर बैठा था, गंभीर बीमारी के बावजूद इसलिए नहीं उठा क्योंकि उसे भरोसा था कि शायद सरकार जागेगी. लेकिन सरकार नहीं जागी और एक आंदोलनकारी की जान चली गई. यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, यह सरकार द्वारा विस्थापितों के साथ किए जा रहे अन्याय और अमानवीय व्यवहार का जीता-जागता प्रमाण है. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रति शासन-प्रशासन का यह उपेक्षापूर्ण रवैया निंदनीय ही नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है.
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आगे उन्होंने कहा, विपक्ष मांग करता है कि मृतक दिलीप कुमार के परिवार को तत्काल उचित मुआवज़ा दिया जाए. टिहरी बांध विस्थापितों की लंबित मालिकाना मांगों पर निर्णय लिया जाए. इस मौत की नैतिक ज़िम्मेदारी राज्य सरकार स्वीकार करे. अगर आज भी सरकार नहीं जागी, तो यह साफ़ हो जाएगा कि सरकार के लिए जमीन से जुड़े लोगों की ज़िंदगी से ज़्यादा अहम सिर्फ़ प्रचार और सत्ता है.
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