पटना। राजधानी के एक होटल में कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और पार्टी के सभी छह विधायक मौजूद रहे। मुख्य एजेंडा बजट पेश होने के बाद सरकार को सदन और सड़क पर किस तरह घेरना है, इस पर रणनीति तैयार करना था। पार्टी नेतृत्व ने महागठबंधन की एकजुटता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

विधायक दल के नेता पर फिर टली मुहर

बैठक में विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम निर्णय होना था, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। छह विधायकों के बीच एक राय न बनने के कारण मामला फिलहाल टल गया है। तय हुआ है कि इस मुद्दे पर जल्द ही दोबारा बैठक होगी। चुनाव परिणाम आने के दो महीने बाद भी नेता का चयन न हो पाना पार्टी के लिए असहज स्थिति माना जा रहा है।

महागठबंधन के साथ रहने का निर्देश

सूत्रों के अनुसार, सभी छह विधायकों को सदन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। महागठबंधन की मजबूती दिखाने के लिए मंगलवार शाम 5 बजे तेजस्वी यादव के आवास पर बैठक बुलाई गई है, जिसमें गठबंधन के सभी विधायक शामिल होंगे।

दिल्ली बैठक के बाद भी नहीं बनी बात

23 जनवरी को दिल्ली में हुई बैठक में भी विधायक दल के नेता पर फैसला होने की उम्मीद थी, लेकिन तब भी सहमति नहीं बन पाई। इस बीच विधानसभा का एक सत्र गुजर चुका है और अब बजट सत्र शुरू हो गया है।

अनुपस्थिति से बढ़ी अटकलें

हाल की बैठकों में कुछ विधायकों की गैरमौजूदगी से पार्टी में असंतोष और टूट की अटकलें तेज हुईं। मनरेगा आंदोलन की बैठक में अभिषेक रंजन और सुरेंद्र प्रसाद अनुपस्थित थे, जबकि प्रदेश प्रभारी की बैठक में मनोहर सिंह नहीं पहुंचे थे।

दो नामों पर चर्चा

विधायक दल के नेता के लिए मनिहारी के मनोहर प्रसाद सिंह और चनपटिया के अभिषेक रंजन के नाम प्रमुख हैं। मनोहर सिंह चार बार के विधायक और आदिवासी समुदाय से हैं, जबकि अभिषेक रंजन युवा चेहरे के तौर पर उभरे हैं।