अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. अलीनगर क्षेत्र में इन दिनों बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. दर्जनों बंदरों का झुंड आबादी वाले इलाकों में खुलेआम घूम रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है. स्थिति यह है कि लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बंदरों के आतंक को रोकने को लिए जिम्मेदार क्या कदम उठा रहे हैं?
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स्थानीय निवासियों के अनुसार, बंदरों द्वारा लोगों को काटने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. सुबह से शाम तक बंदर गलियों, मोहल्लों और घरों के आसपास मंडराते रहते हैं. राहगीरों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी इनके हमले का डर सता रहा है.
बंदर फल-सब्जियों, राशन और घरेलू सामानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. छतों पर रखी वस्तुएं उठाकर फेंक देना और घरों में घुसकर खाद्य सामग्री ले जाना आम बात हो गई है. छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समस्या और भी गंभीर बनी हुई है.
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ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभागों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है. इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है. क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों या जंगलों में छोड़ा जाए, ताकि अलीनगर क्षेत्र के लोगों को इस बढ़ते खतरे से राहत मिल सके और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित हो सके.
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