केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को घोषणा की कि दक्षिण कश्मीर से गुजरने वाली प्रस्तावित रेलवे परियोजनाओं को रोक लगा दिया गया है। इस फैसले के पीछे रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण में सेब के बागों को नुकसान पहुंचना बताया जा रहा है। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने इस घोषणा पर खुशी जाहीर की है।
रेलवे लाइनों पर रोक से कश्मीर की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को राहत
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी सांसदों को इसके लिए आभार व्यक्त करते हुए, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि अनंतनाग-पहलगाम और अनंतनाग-शोपियां के बीच प्रस्तावित रेलवे ट्रैक को रोकने से लोगों की आजीविका और बागों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। पार्टी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, “यह एक ऐसी सरकार है जो जनता की चिंताओं को सुनती है और उन पर कार्रवाई करती है।” वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पहलगाम और शोपियां रेलवे लाइनों को रोक देने के फैसले से कश्मीर की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को राहत मिली है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा, “इन परियोजनाओं से उपजाऊ जमीन के नष्ट होने का खतरा था और दस लाख से ज़्यादा ग्रामीण परिवारों के भविष्य पर अनिश्चितता का साया मंडरा रहा था। किसानों को विस्थापित करने वाला विकास प्रगति नहीं है।” मुफ्ती ने यह भी कहा कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने की रक्षा के लिए भविष्य की किसी भी योजना की पारदर्शी समीक्षा की जानी चाहिए जिसमें किसानों और स्थानीय समुदायों को भी शामिल किया जाए।
रेलमंत्री ने क्या कहा ?
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र शासित प्रदेश के सांसदों के अनुरोधों का हवाला देते हुए कहा, “मौजूदा बारामूला-श्रीनगर लाइन के अलावा दो से तीन और रेलवे लाइनें बिछाने की मांग थी। हालांकि, राज्य सरकार और सांसदों ने तब कहा कि इन लाइनों का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। इन परियोजनाओं को फिलहाल रोक दिया गया है। तीन परियोजनाओं पर सर्वेक्षण शुरू हो गए थे लेकिन सेब के बागों को नुकसान पहुंचने की संभावना थी। इसलिए, उन्हें फिलहाल रोक दिया गया है।”
कश्मीर में तीन नई रेल लाइनों के लिए हो रहे थे सर्वे
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में, रेलवे ने दिसंबर 2023 में कहा था कि तीन नई लाइनों- सोपोर-कुपवारा (33.7 किमी), अवंतीपोरा-शोपियां (27.6 किमी) और अनंतनाग-बिजबेहरा-पहलगाम (77.5 किमी) के लिए सर्वेक्षण स्वीकृत किए गए थे। ये क्षेत्र घाटी के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र हैं। शोपियन और अनंतनाग जिलों से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइनों की घोषणा होते ही सेब किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों ने पेड़ों की कटाई का विरोध किया क्योंकि वे पिछले साल भूस्खलन के कारण लगे झटकों से अभी भी उबर नहीं पाए थे।
स्थानीय लोगों का अनुमान था कि इन परियोजनाओं के लिए शोपियां और पुलवामा जिलों में लगभग 7 लाख सेब के पेड़ काटे जा सकते हैं। सरकारी अनुमानों के अनुसार, बागवानी क्षेत्र केंद्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और लगभग 33 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
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