आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज(Saurabh Bhardwaj) ने प्राइवेट स्कूल फीस कंट्रोल एक्ट को लेकर भाजपा सरकार पर कड़ा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेखा गुप्ता(Rekha Gupta) सरकार और प्राइवेट स्कूल लॉबी ने मिलकर कोर्ट में ड्रामा किया और आखिरकार सरकार ने सरेंडर कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्राइवेट स्कूल एक्शन कमिटी ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया, उसके अध्यक्ष भाजपा के दिल्ली शिक्षक प्रकोष्ठ के सदस्य हैं। सौरभ भारद्वाज का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी नीतियों और प्राइवेट स्कूलों के बीच गठजोड़ आम छात्रों और अभिभावकों के हित के खिलाफ गया।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही निजी स्कूलों ने 20 से 80 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी। जब पैरेंट्स ने विरोध जताते हुए सड़कों पर आवाज उठाई, तो सरकार ने उन्हें फीस कंट्रोल कानून लाने का झांसा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून चोरी-छिपे लाया गया और बिना किसी व्यापक चर्चा के ही लागू कर दिया गया। सौरभ भारद्वाज ने इसे हास्यास्पद बताया कि जिस कानून के जरिए निजी स्कूलों में बढ़ी फीस को कम करना संभव नहीं है, उसी कानून को शिक्षा मंत्री अभिभावकों की जीत के रूप में पेश कर रहे हैं।
फीस नियंत्रण के नाम पर धोखा
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने फीस नियंत्रण कानून लाने का दावा किया, लेकिन इसे चोरी-छिपे बनाया गया। आमतौर पर किसी भी नए कानून को जनता की राय और स्टेकहोल्डर्स की सलाह के लिए वेबसाइट पर रखा जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया। यह कानून बिना किसी चर्चा के विधानसभा में लाकर पास कर दिल्ली की जनता पर थोप दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि AAP ने शुरू से ही इस कानून को बच्चों के हित के खिलाफ और प्राइवेट स्कूल मालिकों की लॉबी व धन्ना सेठों के लिए बनाया गया बताया था। बावजूद इसके, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे मास्टर स्ट्रोक करार दिया था।
प्राइवेट स्कूल मालिकों के साथ साठगांठ
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि कानून लाने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई और इसे बिना सोच-समझ के क्यों लाया गया। इस सवाल के जवाब में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिससे प्राइवेट स्कूल मालिकों के साथ उनकी साठगांठ स्पष्ट हो गई।
सरकार ने कोर्ट में यह भी साफ कर दिया कि 1 अप्रैल 2025 से शुरू हुए 2025-2026 शैक्षणिक सत्र में जो फीस बढ़ाई गई थी, उसकी इस कानून के तहत कोई समीक्षा नहीं होगी, और यह कानून उस बढ़ी हुई फीस पर लागू नहीं होगा। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह कदम उठाकर प्राइवेट स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई 20 से 80 प्रतिशत तक की मनमानी फीस को वैध बना दिया और उसे कानूनी जामा पहनाया। इसका मतलब यह है कि अब कोई भी अभिभावक या कोर्ट चाहकर भी उस बढ़ी हुई फीस को चुनौती नहीं दे सकता।
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