दिल्ली की जेलों में कैदियों की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। जिस उम्र में नौजवानों को कॉलेज, करियर और भविष्य संवारने का समय होना चाहिए, उस उम्र के हजारों युवा जेल की सलाखों के पीछे अपने जीवन का सबसे अहम समय बर्बाद कर रहे हैं। दिल्ली जेलों के आंकड़ों के मुताबिक, कुल कैदियों में से 55% से अधिक की उम्र 30 साल से कम है, जो इस बात का संकेत है कि युवाओं के बीच अपराध और जेल जाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। यह स्थिति समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंताजनक संकेत मानी जा रही है।

चौंकाने वाले आंकड़े

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की 16 जेलों में कुल 18,969 कैदी बंद हैं। इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा युवाओं का है। 21-30 साल की उम्र के कैदी: 9,434 (लगभग 50%), 18-20 साल की उम्र के कैदी: 1,104, कुल मिलाकर 55% से अधिक कैदी 30 साल से कम उम्र के हैं। वहीं, 65 साल से ऊपर के केवल 167 कैदी हैं। इस आंकड़े ने सवाल खड़ा कर दिया है कि इतनी उम्र और बीमारी में रहने वाले बुजुर्गों को जेल में रखने का क्या मकसद है। यह डेटा दर्शाता है कि जेलों में कैदियों की बड़ी संख्या युवा वर्ग की है, जबकि बुजुर्ग और बीमार कैदी बेहद कम हैं, जिससे सुरक्षा और सुधार नीति पर नए सवाल उठते हैं।

आखिर क्यों अपराध की दुनिया में कूद रहे युवा?

एक पूर्व कानून सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि युवाओं के जेल जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह जल्दी पैसा कमाने का लालच है। उनके मुताबिक, बेरोजगारी, गरीबी और आय का कोई स्थायी जरिया न होने की वजह से कई युवा अपराध की ओर धकेले जा रहे हैं। खासतौर पर इनमें से ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं।

दोषी कम, ‘इंतजारकरने वाले ज्यादा

दिल्ली की कुल 18,969 कैदियों में से 87% यानी 16,512 लोग विचाराधीन हैं, यानी उनके मामलों का फैसला अभी कोर्ट में लंबित है। इसका मतलब यह है कि जेल में बंद हर शख्स अपराधी साबित नहीं हुआ है। हालांकि कानूनी सहायता अब बेहतर हुई है और लोगों को मुफ्त वकील उपलब्ध कराए जा रहे हैं, इसके बावजूद जेलों में भीड़ कम नहीं हुई। यह दर्शाता है कि विचाराधीन कैदियों की संख्या और न्याय प्रणाली में लंबित मामलों का बोझ जेलों पर भारी पड़ रहा है।

महिलाओं की कहानी थोड़ी अलग है

दिल्ली की जेलों में 98% कैदी पुरुष हैं, लेकिन महिला कैदियों का प्रोफाइल अलग दिखता है। जेल में कुल 741 महिलाएं हैं, जिनमें से 61% की उम्र 31 से 50 साल के बीच है। इस आंकड़े से संकेत मिलता है कि महिलाएं अपराध की दुनिया में कम उम्र में नहीं, बल्कि सालों तक घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी या अन्य सामाजिक परेशानियों झेलने के बाद ही जेल में कदम रखती हैं। यह दिखाता है कि महिलाओं के अपराध के कारण अक्सर सामाजिक और आर्थिक दबाव होते हैं, जबकि पुरुषों में यह जल्दी पैसा कमाने और अवसर के लालच से जुड़ा है।

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