Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान आवास विहीन परिवारों का मुद्दा छाया रहा। चर्चा एक बिंदु पर सिमटने के बजाय होमलेस, बेघर और भूमिहीन की परिभाषाओं में उलझती चली गई। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा के जवाबों से असंतुष्ट विपक्ष ने उन्हें घेर लिया, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा और तीखी नोंकझोंक देखने को मिली। हालात संभालने के लिए उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को बीच में उतरना पड़ा।
भरतपुर विधायक के सवाल से शुरू हुआ विवाद
भरतपुर से विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने अपने क्षेत्र में आवास विहीन परिवारों को लेकर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या जिला कलेक्टर ने आवास नीति के तहत कोई बैठक की है और क्या नीति में सर्वे व समिति गठन का स्पष्ट प्रावधान है। गर्ग का आरोप था कि मंत्री मूल सवाल का जवाब देने के बजाय उसे प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़कर टाल रहे हैं।

पात्र को मिलेगा लाभ
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जवाब में कहा कि जो भी व्यक्ति पात्रता पूरी करता है, उसे आवास का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2016-17 से अब तक 302 पात्र लोगों को योजना का लाभ मिला है, जबकि पिछले दो वर्षों में 54 परिवारों को पात्र माना गया। मंत्री के अनुसार PMAY शहरी 2.0 के तहत आवेदन ऑनलाइन होते हैं और निकाय के भौतिक सत्यापन के बाद ही केंद्र से स्वीकृति मिलती है।
बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और डॉ. सुभाष गर्ग के बीच तीखी बहस हुई। गर्ग ने कहा कि प्रश्न के एक हिस्से में आवास विहीन परिवारों की बात थी, जबकि जवाब दूसरी योजना पर दिया जा रहा है। हंगामा बढ़ता देख राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार दोनों ही सवालों के जवाब देने को तैयार है और इसमें कोई चालबाजी नहीं है।
मंत्री के तीखे तेवर, विपक्ष पर आरोप
विपक्ष के लगातार विरोध के बीच मंत्री खर्रा का लहजा सख्त हो गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नियमों और प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक शहरी आवास योजनाओं में लाभ पाने के लिए व्यक्ति को स्वयं आवेदन करना होता है, जिसकी जांच स्थानीय निकाय करता है।
टीकाराम जूली का हमला
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार खुद ही भ्रम की स्थिति में है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब सदन में परिभाषाएं समझाने के लिए वकील की जरूरत पड़ रही है। जूली का आरोप था कि मंत्री आवास विहीन और होमलेस पॉलिसी को अलग-अलग बताकर सदन को भ्रमित कर रहे हैं।
अध्यक्ष के हस्तक्षेप पर दी गई परिभाषाएं
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के हस्तक्षेप के बाद मंत्री खर्रा ने शब्दों की स्पष्ट व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भूमिहीन वह है जिसके पास जमीन नहीं है, आवास विहीन वह है जिसके पास प्लॉट है लेकिन पक्का मकान नहीं, जबकि बेघर वह है जिसके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है। मंत्री ने अंत में जिला कलेक्टर से रिपोर्ट मंगवाने का भरोसा दिलाया, लेकिन विपक्ष जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आया।
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