दिल्ली की साकेत कोर्ट ने वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा (Rajat Sharma) द्वारा दायर मानहानि मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं रागिनी नायक(Ragini Nayak), पवन खेड़ा(Pawan Kheda) और जयराम रमेश(Jairam Naresh) को  आपराधिक मानहानि और जालसाजी के आरोपों में समन जारी किया है और 27 जुलाई 2026 को पेश होने का आदेश दिया। शिकायत में रजत शर्मा ने आरोप लगाया कि रागिनी नायक ने उन पर दुर्व्यवहार करने का झूठा आरोप लगाया और दावा किया कि 4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव नतीजों की लाइव डिबेट में उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर नायक के दावों को दोहराया और वीडियो साझा किया, जिससे मामले ने गंभीर रूप लिया।

JMFC कोर्ट ने जारी किया समन

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा के आवेदन पर रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को समन जारी किया। शर्मा ने आवेदन में तीनों नेताओं पर जालसाजी, झूठा दस्तावेज बनाने और मानहानि के आरोप लगाए थे। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) देवंशी जन्मेजा ने आरोपों और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की समीक्षा के बाद तीनों नेताओं को 27 जुलाई 2026 को पेश होने का आदेश दिया।

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों ने जानबूझकर रजत शर्मा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से सोशल मीडिया पर भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री साझा की। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) देवंशी जन्मेजा ने अपने सोमवार को जारी आदेश में कहा कि इस आधार पर IPC की धारा 465, 469, 471, 499 और 500 के तहत रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को 27 जुलाई 2026 को पेश होने का समन जारी करने के पर्याप्त कारण हैं।

‘आरोपियों को वीडियो का रॉ फुटेज नहीं दिया गया’ सुनवाई के दौरान दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कहा कि घटना का रॉ फुटेज कभी भी आरोपी नेताओं को नहीं दिया गया था। इसके बावजूद रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर वीडियो पोस्ट किया, जो इंडिया टीवी के लाइव या टेलीकास्ट फुटेज को रिकॉर्ड कर संपादित किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह धारा 465 (जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग) के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इस वीडियो पोस्ट करने के कारण ही सामग्री मानहानिकारक और भ्रामक मानी जा रही है, जिस पर कोर्ट ने तीनों नेताओं को समन जारी किया।

वीडियो पर कैप्शन के रूप में अपशब्दों को जोड़ा

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता रजत शर्मा ने यह साबित कर दिया है कि रॉ फुटेज न मिलने के बावजूद आरोपी नेताओं ने 4 जून 2024 के टीवी शो का टेलीकास्ट फुटेज प्राप्त किया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। इसके वीडियो पर कैप्शन और टेक्स्ट के रूप में अपशब्द जोड़कर ऐसा दिखाया गया कि शर्मा ने अपशब्द कहे, जबकि वे लाइव टेलीकास्ट का हिस्सा नहीं थे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में स्पष्ट बदलाव (एडिटिंग) नजर आता है। वीडियो में मौजूद टाइटल और कैप्शन यह दर्शाते हैं कि यह पोस्ट-प्रोडक्शन फाइल है, न कि सीधे लाइव फुटेज।

दिल्ली हाई कोर्ट के पिछले आदेश का भी किया जिक्र

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने रजत शर्मा मानहानि मामले में यह भी बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जून 2024 में स्पष्ट किया था कि वीडियो देखने पर पहली नजर में ऐसा प्रतीत नहीं होता कि रजत शर्मा ने किसी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। हाई कोर्ट ने पहले ही कांग्रेस नेताओं को विवादित पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश जारी किया था। साकेत कोर्ट ने इस आदेश को देखते हुए समन जारी करना और मामले की आगे की सुनवाई ट्रायल के तहत सुनिश्चित करना उचित समझा।

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