सुप्रीम कोर्ट ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी से की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ‘अस्पष्ट और अनुचित देरी’ पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई बैंकों की शिकायतों के बावजूद केवल एक ही FIR दर्ज करना प्रक्रियात्मक कानून के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने CBI और ED को निष्पक्ष और तटस्थ जांच करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा- ED और CBI ने पहले ही बहुत समय ले लिया
कोर्ट ने कहा, “CBI ने 2025 में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर एक FIR दर्ज की। इसके बाद अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों को उसी FIR के दायरे में शामिल कर लिया गया, जबकि प्रत्येक बैंक की शिकायत अलग लेन-देन से संबंधित है। इसके लिए अलग-अलग FIR दर्ज होनी चाहिए। ED और CBI दोनों ने पहले ही काफी समय ले लिया है और अब उनसे त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।”
कोर्ट ने कहा- बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच हो
कोर्ट ने ED को आदेश दिया है कि वह इस कथित घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करे। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एजेंसियों से 4 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने CBI को यह भी निर्देश दिया कि वह बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की भी जांच करे।
अनिल के वकील बोले- वे देश छोड़कर नहीं जाएंगे
सुनवाई के दौरान जब अनिल अंबानी के विदेश भागने की आशंका जताई गई, तो उनके वकील ने कहा, “वह भागेंगे क्यों? वह यहीं हैं। वह इस कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।” वहीं, जांच एजेंसियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि संबंधित व्यक्तियों को जांच के दौरान देश से बाहर जाने से रोकने के लिए पहले से ही कई लुक आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं।
जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है कोर्ट
यह पूरा मामला पूर्व नौकरशाह EAS सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर आधारित है। याचिका में अनिल के नेतृत्व वाले रिलायंस ADAG की कई संस्थाओं में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि बैंकों से लिए गए पब्लिक फंड को व्यवस्थित तरीके से डायवर्ट किया गया, कंपनियों के बैलेंस शीट और वित्तीय दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई और इस पूरे घोटाले में कई वित्तीय संस्थानों की भी मिलीभगत रही है।
अनिल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के 4 मामले
अनिल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के 4 मामले दर्ज हैं। रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड समेत समूह की अन्य कंपनियों ने बैंकों से 12,524 करोड़ रुपये का लोन लिया था। इसमें से 6,931 करोड़ रुपये का लोन गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) घोषित हो गया। ये राशि रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों को वापस भेज दी गई। SBI, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और यस बैंक से मिले लोन में अनियमितता मिली है। उनको बैंकों ने फ्रॉड घोषित किया है।
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