अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का काम 20 जनवरी को पूरा हो चुका है, लेकिन मऊगंज जिले की नईगढ़ी जनपद पंचायत के बन्नई केंद्र से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती हैं। आरोप है कि यहां लगभग 3000 क्विंटल उत्तम क्वालिटी की धान गायब कर दी गई है और उसकी भरपाई करने के लिए उत्तर प्रदेश से सड़ी-गली और मिट्टी मिली धान मंगाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जब मीडिया ने जांच अधिकारी से सवाल किया, तो उन्होंने कैमरे से दूरी बना ली और कहा कि आप यहां से चले जाओ और कलेक्टर से बात करो मैं कुछ नहीं बोलूंगा। आखिर 70 लाख के इस घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है ?

पड़ोसी राज्य से मंगाई जा रही खराब धान

नियम कहते हैं कि किसानों से खरीदी गई पाई-पाई का हिसाब सरकार के पास होना चाहिए, लेकिन बन्नई धान खरीदी केंद्र में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों और शिकायतकर्ता की मानें तो यहां से लगभग 3098 क्विंटल धान गायब है। आरोप है कि केंद्र प्रबंधक ने किसानों की बढ़िया क्वालिटी की धान ऊंचे दामों पर व्यापारियों को बेच दी और अब उस कमी को पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से सड़ी-गली, खखरे वाली और मिट्टी मिली धान मंगाई जा रही है।

सिंडिकेट में कौन-कौन शामिल ?

भ्रष्टाचार का यह खेल यहीं नहीं रुकता। रात के अंधेरे में उत्तर प्रदेश से गाड़ियां आती हैं और खराब धान को केंद्र पर उतारा जाता है। इसके बाद ट्रक चिट के सहारे इस कचरे जैसी धान को वेयरहाउस में जमा कराया जा रहा है। सवाल यह है कि वेयरहाउस के अधिकारी इस सड़ी-गली धान को स्वीकार कैसे कर रहे हैं ? क्या इस सिंडिकेट में ऊपर तक के लोग शामिल हैं ? जब इस धांधली की खबर प्रशासन तक पहुंची, तो जांच के लिए अनमोल जैन को भेजा गया। लेकिन जांच के नाम पर कुछ नहीं हुआ।

घोटालेबाजों को बचाने की कोशिश

मीडिया ने जब मौके पर मौजूद यूपी की धान और गायब स्टॉक पर सवाल किया, तो अधिकारी महोदय ने साफ कह दिया कि मैं कुछ नहीं बोलूंगा, कलेक्टर साहब से बात कर लो। अधिकारी का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ इशारा कर रहा है कि कहीं न कहीं घोटालेबाजों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

निष्पक्ष जांच या फिर होगी लीपापोती

आपको बता दें कि इस केंद्र पर कुल 38,935 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज है। इसमें से 1,256 क्विंटल रिजेक्ट दिखाई गई है। लेकिन असल खेल उस 3,000 क्विंटल धान का है जो केंद्र से नदारद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस केंद्र में विवाद की शुरुआत पहले ही हो गई थी और ज्ञापन भी दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने वक्त रहते आंखें नहीं खोलीं। अब सवाल यह है कि क्या मऊगंज खाद्य विभाग के अधिकारी इस 70 लाख के घोटाले की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर लीपापोती कर फाइल बंद कर दी जाएगी?

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