लोकसभा में भारी हंगामे के कारण आज भी कार्यवाही स्थगित हो गई। इसके चलते अब तय हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं होगा। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देने वाले थे। प्रधानमंत्री का भाषण बुधवार शाम 5 बजे के लिए निर्धारित था, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। बिना पीएम के भाषण के ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। यह घटना 2004 के बाद पहली बार हुई है, जब तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह भी अपना भाषण नहीं दे पाए थे। इस बार कुल तीन सांसद ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा में अपनी स्पीच पूरी कर सके।

राष्ट्रपति की ओर से संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के बाद उस भाषण पर हमेशा परिचर्चा होती है। इस चर्चा के अंत में प्रधानमंत्री का जवाब देने का रिवाज है, लेकिन 2004 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि प्रधानमंत्री के बिना ही राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सुझावों को सदन में रखा, जिन्हें खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि इस बीच सदन में सांसदों की नारेबाजी जारी रही।

हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव मंजूर, कार्य़वाही करनी पड़ी स्थगित

लोकसभा में हंगामे के कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज शाम को राज्यसभा में भाषण होना है। जानकारी के अनुसार, इस दौरान भी विपक्ष की ओर से हंगामा होने की संभावना है। दरअसल, पीएम मोदी बुधवार को लोकसभा में बोलने वाले थे, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण यह संभव नहीं हो सका। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यदि नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया, तो पीएम को भी भाषण का अवसर नहीं मिलेगा।

राहुल गांधी को लोकसभा में भाषण से क्यों रोका गया था?

गौरतलब है कि राहुल गांधी लोकसभा में पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की एक अनपब्लिश्ड पुस्तक का हवाला देते हुए बोलना चाहते थे। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई थी, जिसके चलते उन्हें भाषण देने से रोका गया।

कांग्रेस ने इसे विपक्ष के नेता के अधिकार का हनन बताया और तब से ही विपक्ष यह कह रहा था कि यदि राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया, तो पीएम मोदी को भी भाषण नहीं देंगे। इसी विवाद के कारण अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

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