राष्ट्रपति के अभिभाषण पर कितना जरूरी होता है पीएम का संबोधन...

लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस पूरी हो चुकी है, लेकिन एक सवाल अब भी है.

जिस जवाब का इंतजार पूरे सदन को था, वह आया ही नहीं. तय समय, तय तारीख और तय उम्मीदों के बावजूद प्रधानमंत्री का संबोधन नहीं हो सका

और आखिरकार धन्यवाद प्रस्ताव पारित भी हो गया. ऐसे में अब बहस इस बात पर है कि क्या संसद प्रधानमंत्री के जवाब के बिना भी पूरी मानी जा सकती है?

संविधान की नजर से देखें तो प्रधानमंत्री का संबोधन अनिवार्य नहीं है.

कहीं भी यह नहीं लिखा है कि धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के बाद प्रधानमंत्री को ही जवाब देना होगा.

संसद की कार्यवाही राष्ट्रपति के अभिभाषण, धन्यवाद प्रस्ताव और उस पर वोटिंग के साथ पूरी मानी जाती है.

अगर प्रधानमंत्री किसी कारण से जवाब नहीं देते हैं, तो भी धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया जा सकता है, जैसा कि इस बार हुआ.

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