वीरेंद्र कुमार/ नालंदा। बिहार शरीफ के गौरक्षणी परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राष्ट्र रक्षा यज्ञ सह विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदू संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का व्यापक प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी संख्या में साधु-संत, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए, जिससे पूरा परिसर धार्मिक और राष्ट्रवादी वातावरण से गूंज उठा।
जनसंख्या और सांस्कृतिक पहचान पर चिंता
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामानुजाचार्य ने देश की वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्व में अब कोई भी देश पूर्ण रूप से हिंदू राष्ट्र नहीं है। नेपाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जो कभी एकमात्र हिंदू राष्ट्र था, वह अब धर्मनिरपेक्ष हो चुका है। उन्होंने जनसंख्या संतुलन, परिवार व्यवस्था और सामाजिक जागरूकता पर बल देते हुए हिंदू समाज से संगठित रहने की अपील की। उनके अनुसार, बहुसंख्यक समाज की जागरूकता से ही देश की सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक व्यवस्था मजबूत रह सकती है।
धर्मांतरण और संगठन पर जोर
धर्मांतरण के मुद्दे को गंभीर बताते हुए रामानुजाचार्य ने समाज से सतर्क रहने और जनजागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। वहीं महंत घनश्याम दास ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को संघ की शाखाओं में भेजें, जहां उन्हें अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभाव की शिक्षा मिलती है। उन्होंने शाखाओं को संस्कार निर्माण का केंद्र बताया।
इस विराट आयोजन ने क्षेत्र में राष्ट्रवाद, संस्कृति और संगठन की शक्ति को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
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