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अजयारविंद नामदेव, शहडोल। डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है, लेकिन जब वही भगवान लापरवाही बरतने लगे, तो जीवन नरक बन जाता है। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला शहडोल जिले से सामने आया है, जहाँ एक निजी अस्पताल की कथित लापरवाही ने एक महिला की हंसती-खेलती जिंदगी को मुश्किलों के भंवर में डाल दिया है। न्याय की आस में अब पीड़िता पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों की चौखट के चक्कर काटने को मजबूर है।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता ऊषा देवी पनाड़िया ने पिपरिया स्थित अमृता हॉस्पिटल की डॉ. अनुपमा जैन से गर्भाशय (बच्चेदानी) की समस्या के संबंध में परामर्श लिया था,डॉक्टर की सलाह पर 12 नवंबर 2025 को उनका ऑपरेशन किया गया,आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान घोर लापरवाही बरतते हुए महिला के ब्लैडर (मूत्रशय) में कट लगा दिया गया,​इस गंभीर चूक का परिणाम यह हुआ कि ऑपरेशन के बाद से ही पीड़िता को लगातार पेशाब के रिसाव की समस्या शुरू हो गई। जब महिला ने इसकी शिकायत संबंधित डॉक्टर से की, तो राहत देने के बजाय उनसे सुधार के लिए अतिरिक्त रुपयों की मांग की गई। 

​आर्थिक और शारीरिक बोझ से दबी पीड़िता

​पीड़िता का कहना है कि वे पहले ही ऑपरेशन के लिए लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च कर चुकी हैं। अब इस नई समस्या के कारण उन्हें रोजाना लगभग 1000 रुपये के डायपर इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं। बिलासपुर और नागपुर (वोकार्ड हॉस्पिटल) में जांच कराने पर डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि ऑपरेशन के दौरान ही ब्लैडर में कट लगा है, जिसे ठीक करने में अब 4 से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। 

​अपनी आपबीती लेकर ऊषा देवी अब जिले के कार्यालय पहुंची हैं। उन्होंने लिखित शिकायत सौंपकर डॉक्टर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और अपने इलाज के खर्च की वापसी की मांग की है। महिला का कहना है कि एक गरीब परिवार के लिए लाखों का खर्च वहन करना असंभव है।

​अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर चिकित्सा लापरवाही पर क्या संज्ञान लेता है। क्या एक बेबस महिला को उसका हक और न्याय मिल पाएगा, या रसूखदार अस्पतालों के आगे यह आवाज भी दबकर रह जाएगी। वही इस मामले में अमृता अस्पताल के एचआर राहुल सोनी का कहना है कि उनके द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार है ,क्रिटिकल कंडीशन उनका इलाज किया गया था। 

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