दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक दर्दनाक हादसे में बाइक सवार युवक कमल की मौत ने सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसा सड़क पर खुले गड्ढे में गिरने के कारण हुआ। परिवार और दोस्तों का आरोप है कि यह घटना पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि गड्ढा काफी समय से खुला पड़ा था और बार-बार शिकायत के बावजूद इसे ठीक नहीं किया गया। इस घटना को देखते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी से आज शाम तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट में सभी जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका का आकलन किया जाएगा।

जनकपुरी इलाके में 5 फरवरी की रात एक दर्दनाक हादसे में बाइक सवार युवक कमल की मौत हो गई। हादसा कथित तौर पर सड़क पर खुले गड्ढे में गिरने से हुआ। परिवार और दोस्तों का आरोप है कि यह घटना पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि गड्ढा काफी समय से खुला पड़ा था और बार-बार शिकायत के बावजूद इसे ठीक नहीं किया गया। हादसा रात के समय हुआ, लेकिन सुबह तक किसी स्तर पर प्रभावी खोज या सूचना नहीं दी गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर पुलिस और संबंधित विभाग समय पर सक्रिय होते, तो कमल की जान बचाई जा सकती थी।

मृतक के भाई ने कहा- यह सरासर लापरवाही

परिवार ने पुलिस और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। मृतक कमल के भाई करण ने बताया कि आखिरी बार बात होने पर कमल ने कहा था कि वह 10 मिनट में घर पहुंच जाएगा। रात करीब 12:30 बजे जब दोबारा कॉल किया गया, तो फोन नहीं उठा। इसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। करण के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले कमल के रोहिणी स्थित ऑफिस का रुख किया और फिर जनकपुरी थाने पहुंचे। पुलिस ने केवल उसकी अंतिम लोकेशन बताई और कहा कि वह लगभग 200 मीटर के दायरे में है, खुद खोज लो। परिवार ने बताया कि मौके पर कोई ठोस मदद नहीं मिली। करण ने आगे कहा कि वे लगातार खोज करते रहे और रात 1:30 बजे गड्ढे के पास भी पहुंचे, लेकिन उस समय कमल वहां नहीं दिखा। इसके बावजूद किसी तरह की घेराबंदी या सर्च ऑपरेशन नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि समय पर प्रभावी खोज और सक्रियता की कमी ने कमल की जान लेने में अहम भूमिका निभाई।

पुलिस ने कहा शिकायत 24 घंटे बाद ही दर्ज होगी- भाई

मृतक के दूसरे भाई ने बताया, “कल रात करीब 11:30 बजे हमने उनसे बात की। उन्होंने कहा कि वे डीसी सेंटर पहुंच गए हैं और घर आने में 15 मिनट लगेंगे। इसके बाद 30 मिनट तक हमने उन्हें 10 बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। हम परेशान हो गए और उन्हें ढूंढने निकल पड़े, लेकिन वे नहीं मिले।”

उन्होंने आगे कहा, “जब हम जनकपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गए, तो कहा गया कि शिकायत 24 घंटे बाद ही दर्ज की जा सकती है। हमने अनुरोध किया कि उनके फोन की घंटी बजते समय ही उन्हें ट्रैक करें। पुलिस ने लोकेशन ढूंढकर हमें भेजी, लेकिन बाद में इसे डिलीट कर दिया। जब हम दोबारा गए, तो कहा गया कि वे हमें लोकेशन दोबारा नहीं दे सकते क्योंकि यह गोपनीय जानकारी है।” करण ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस उदासीनता और समय पर प्रभावी कार्रवाई की कमी ने हादसे में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय लोग और परिवारजन भी आरोप लगा रहे हैं कि गड्ढा काफी समय से खुला पड़ा था और बार-बार शिकायत करने के बावजूद इसे ठीक नहीं किया गया।

दोस्तों ने भी प्रशासन पर आरोप लगाए

एक दोस्त ने कहा कि पूरी रात वे इधर-उधर भटकते रहे और पुलिस ने खुद तलाश करने को कहा। परिवार को बार-बार यह झूठ बोलना पड़ा कि करण अस्पताल में है, ताकि उसकी मां घबरा न जाए। दोस्तों का आरोप है कि यह केवल हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी है। सड़क पर खुला गड्ढा छोड़ा गया, उस पर न कोई बैरिकेडिंग थी और न चेतावनी। उन्होंने कहा कि अगर रात में ही खोज कर सूचना दे दी जाती, तो कम से कम इलाज का मौका मिल सकता था।

सुबह जब परिवार ने दोबारा कमल के नंबर पर कॉल किया, तो फोन पुलिस ने उठाया और बताया कि शव गड्ढे से बरामद कर लिया गया है। भाई करण ने कहा, “कमल कोई लापरवाह या पागल व्यक्ति नहीं था जो जानबूझकर गड्ढे में गिर जाए। कम से कम छह थानों में जाकर मदद मांगी गई, लेकिन कहीं से कोई सपोर्ट नहीं मिला।” स्थानीय लोग और परिवारजन आरोप लगा रहे हैं कि गड्ढा काफी समय से खुला पड़ा था और बार-बार शिकायत करने के बावजूद इसे ठीक नहीं किया गया।

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